सरकारी जूते सरकार को | EDITORIAL by Rakesh Dubey

28 August 2018

मध्यप्रदेश सरकार और सत्तारूढ़ भाजपा अब तक यह खोजने में असफल रही है, कि उसे किसने वो जूते दिए [प्रदाय] हैं, जो आदिवासी क्षेत्र में विवाद का विषय और कांग्रेस के लिए एक मुद्दा बन गये हैं। प्रदेश के वन मंत्री डॉ गौरी शंकर शेजवार इस मामले की जाँच के आदेश दे चुके हैं। सरकार मान चुकी है, इन जूतों में कैंसर कारक रसायन मौजूद है। सवाल यह है कि इस जूता कांड के पीछे वे कौन सी  शक्तियाँ है जो इस तरह प्राणलेवा रोग के कारक को  जूते की शक्ल में सरकार को बेच चुकी है। शक की सुई जिन लोगों के इर्द-गिर्द है उनके रसूख पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों से एक समान हैं। अभी तो सरकार के जूते सरकार को, देने की कवायद प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्र में जारी है।

मप्र राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा तेंदूपत्ता संग्राहकों को बांटे गए जूतों में कैंसर पैदा करने वाले रसायन की मौजूदगी को लेकर जय आदिवासी युवा शक्ति (जयश) ने प्रदेश में अभियान छेड़ दिया है, कांग्रेस को घर बैठे एक मुद्दा मिल गया है सरकार के खिलाफ। अपना विरोध को दर्शाने के लिए कांग्रेस ने मंडला, डिंडौरी, कटनी, बड़वाह और जयश ने बैतूल व हरदा में आदिवासियों को नए जूते-चप्पल बांटकर पुराने वापस लिए। कांग्रेस इनमें से कुछ सैंपल जांच के लिए लैबोरेटरी भेजना चाहती है। मध्यप्रदेश सरकार भी शायद ऐसा ही कुछ कर चुकी है। नतीजे दोनों के सामने नहीं आ सके है। सरकार को चूना लगाने वालों के हाथ बहुत लम्बे हैं।

मंडला में पूर्व विधायक नारायण पट्टा, डिंडौरी में नीलू ठाकुर, कटनी में अजय गोटिया और बड़वाह में रंजीत ठाकुर आदिवासियों के बीच पहुंचकर उन्हें सरकार द्वारा बांटे गए जूते-चप्पलों से कैंसर बीमारी फैलने के खतरे के बारे में बता रहे हैं। यह प्रतिपक्षी खेमा है। लघु वनोपज संघ और भाजपा पता नहीं, क्यों वे इन स्थानों पर सक्रिय नहीं है। जयश कार्यकर्ताओं ने सरकार की ओर से मिले जूते-चप्पल आदिवासियों से वापस लिए हैं और करीब चार सौ जोड़ी नए जूते-चप्पल खरीदकर बांटे भी है। ऐसा उनका दावा है।

अब यह अभियान प्रदेश के अन्य जिलों में भी  कांग्रेस  की मदद से चलेगा। आदिवासियों से  वापिस लिए गए जूते-चप्पल केंद्रीय चर्म अनुसंधान संस्थान चेन्न्ई या किसी अन्य अधिकृत लैबोरेटरी में परीक्षण के लिए भेजे जाएंगे। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह जूते-चप्पलों में खतरनाक रसायन की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। सवाल यह है कि इस मामले को खरीदी स्तर पर क्यों और किसने अनदेखा किया। जयश को अपने उद्देश्य पूर्ति के लिए मैदान मिल गया है। इस सन्गठन ने हरदा के भवरदी और बैतूल के जामूधाना गांव में तेंदूपत्ता संग्राहक आदिवासियों को नए जूते और चप्पल बांटे।  इस जूता कांड में सरकार की कल्याणकारी योजना ध्वस्त करने वाले कारकों की समय सीमा में जाँच और कार्रवाई अपेक्षित है।
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श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
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