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RGPV: रिसर्च स्टूडेंट्स ने की, विदेश यात्रा पर फैकल्टी जाएंगे | MP NEWS

भोपाल। मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी तकनीकी यूनिवर्सिटी, राजीव गांधी प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय में एक और घालमेल सामने आया है। स्कूल ऑफ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी (एसओआईटी) के एमटेक स्टूडेंट्स द्वारा रिसर्च पेपर तैयार किए गए परंतु उन्हे 12 से 15 अगस्त तक के बीच एथेंस ग्रीस में आईट्रिपलई-ई द्वारा आयोजित साइबर साइंस एंड टेक्नोलॉजी कांग्रेस-2018 में उन्हे प्रस्तुत करने का सौभाग्य नहीं मिलेगा क्योंकि यह सौभाग्य उनसे उनकी गाइड फैकल्टी ने छीन लिया है। दरअसल, यूनिवर्सिटी ने ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं बनाया कि स्टूडेंट को यह अवसर दिया जा सके। अलबत्ता यूनिवर्सिटी में ऐसा प्रावधान जरूर है कि स्टूडेंट की रिसर्च को उसकी गाइड फैकल्टी प्रजेंट करे। 

क्या है मामला
पत्रकार श्री गिरीश उपाध्याय की रिपोर्ट के अनुसार स्टूडेंट यामिनी कोंदुरू के रिसर्च पेपर में सेकंड आॅथर डॉ. निश्चल मिश्रा और एक अन्य स्टूडेंट प्रतीक्षा द्विवेदी के रिसर्च पेपर के थर्ड ऑथर डॉ. रविंद्र पटेल हैं, जिन्हे विदेश जाने का अवसर दिया गया है। मजेदार बात तो यह है कि फैकल्टी जिन रिसर्च पेपर को प्रेजेंट करने जा रही है वह फर्स्ट ऑथर नहीं हैं। आरजीपीवी ने इन फैकल्टी को इस कांफ्रेंस में जाने के अनुमति दे दी है और रजिस्ट्रेशन फीस देने को कहा है। जबकि, इस मामले में रजिस्ट्रार डॉ. एसके जैन ने आपत्ति ली थी कि यह फैकल्टी जिन रिसर्च पेपर को प्रेजेंट करने जा रही है वह फर्स्ट ऑथर नहीं है। इसलिए इन्हें खुद के खर्चे पर जाने की अनुमति दी जा सकती है। इसके बाद भी विश्वविद्यालय रजिस्ट्रेशन फीस देने को तैयार हो गया। वहीं विदेश जाकर रिसर्च पेपर प्रजेंट करने के लिए उसकी गुणवत्ता परखने के लिए विवि द्वारा कमेटी बनाई जाती है। डॉ. मिश्रा के लिए बनाई गई कमेटी में एक सदस्य डाॅ. पटेल भी हैं। यह भी एक अन्य पेपर प्रजेंट करने इसी कांफ्रेंस में जा रहे हैं। डॉ. संजीव शर्मा को शामिल किया। यह इसी पेपर के थर्ड ऑथर हैं। एक अन्य सदस्य डॉ. संजय सिलाकारी हैं। डॉ. पटेल के लिए बनी कमेटी में डॉ. शर्मा, डॉ. सिलाकारी और डॉ. रूपम गुप्ता हैं। 

खुद की रिसर्च करने का टाइम ही नहीं 
रिसर्च पेपर हमारे स्टूडेंट का है। पेपर प्रजेंट करने तो कोई भी जा सकता है। गाइड कभी भी अपना नाम फर्स्ट आॅथर के रूप में नहीं लिखता है। रिसर्च तो हम पहले कर चुके, अब तो बच्चों को ही रिसर्च कराते हैं। खुद की रिसर्च करने का टाइम नहीं मिलता है। इसमें हमारी मेहनत भी है। विवि सिर्फ रजिस्ट्रेशन फीस देने को तैयार हुआ है। 
डॉ. रविंद्र पटेल, एचओडी, एमसीए डिपार्टमेंट 

पेपर प्रेजेंट करने तो कोई भी जा सकता है 
हमारे अंडर जो एमटेक स्कॉलर हैं। उन्हें हम ही गाइड करते हैं। हमारा जो काम रहता उसे रिफाइनमेंट करके आगे बढ़ाते हैं। यह ज्वाइंट पब्लिकेशन होता है। फर्स्ट ऑथर तो स्टूडेंट ही है। पेपर प्रेजेंट करने तो कोई भी जा सकता है। विवि ने सिर्फ रजिस्ट्रेशन फीस देने को कहा है। 
डॉ. निश्चल मिश्रा, फैकल्टी मेंबर एसओआईटी
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