मप्र में पौधा खरीदी घोटाला! जिस नर्सरी की जांच चल रही है, उसी से फिर खरीदी | MP NEWS

28 July 2018

भोपाल। नर्मदा के नाम पर सीएम शिवराज सिंह वोट जुटाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं तो दूसरी तरफ कुछ लोग नोट कमाने की जुगाड़ लगाए बैठे हैं। पिछले साल नर्मदा सेवा यात्रा के नाम पर नर्मदा नदी के किनारे 6 करोड़ पोधो का रोपण किया गया था। उनका क्या हुआ, कितने पेड़ बने कितने पौधे अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए। 6 करोड़ पौधे रोपे गए भी या नहीं। यह सबकुछ अब तक रहस्य बना हुआ है। अब एक बार फिर नमामि देवी नर्मदे अभियान की शुरूआत की जा रही है और इस अभियान के नाम पर पौधा खरीदी घोटाला शुरू हो गया है। मुरझाए हुए पौधे खरीदे जा रहे हैं और कैबिनेट में आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद भी खरीदे जा रहे हैं। 

क्या है मामला
पत्रकार श्री शैलेंद्र चौहान की रिपोर्ट के अनुसार 12 जुलाई को मुरझाए पौधों की खरीदी का मामला कैबिनेट में उठा तो सीएम ने निर्देश दिए पिछले साल लगे पौधों का सत्यापन होगा। अफसरों को शोकाज नोटिस दिया जाएगा। नर्सरी के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके बाद सचदेव नर्सरी के खिलाफ जांच शुरू हो गई। आरोप है कि उसने अनार के 60 लाख मुरझाए हुए पौधों की सप्लाई की। 2 अधिकारियों को भी नोटिस दिए गए लेकिन इसके बाद फिर उसी सचदेव नर्सरी को पौधों की सप्लाई का आदेश दे दिया गया जबकि अभी जांच पूरी नहीं हुई है। 

पूरी खरीदी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में 
उद्यानिकी विभाग की 387 नर्सरी हैं। बावजूद इनमें सिर्फ 13 लाख पौधे ही तैयार किए गए। विभाग के पास इस साल 27 करोड़ रुपए का बजट है। पिछले साल की लेनदारी 19 करोड़ चुकाना थी। बावजूद 10 करोड़ से ज्यादा के पौधे खरीद लिए गए। कैबिनेट में मामला आने पर खरीदी निरस्त कर दी। अब मंत्री के आदेश के बाद फिर 40 करोड़ रुपए के पौधे खरीदने की तैयारी है। 

इन आदेशों से समझिए, खेल क्या चल रहा है
16 जुलाई: कैबिनेट में मुरझाए पौधे खरीदने पर मंत्रियों ने ऐतराज जताया। सीएम ने निर्देश दिए पिछले साल लगे पौधों का सत्यापन होगा। अफसरों को शोकाज नोटिस दिया जाएगा। नर्सरी के खिलाफ कार्रवाई होगी। 
17 जुलाई: आयुक्त सत्यानंद ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कैबिनेट के बिन्दुओं के मुताबिक पौधों की खरीदी नहीं करने को कह दिया। 
18 जुलाई: आदेश के हवाले से उप संचालक राजेंद्र राजौरिया ने पौधों की खरीदी पर रोक लगा दी। आदेश निकाला कि पौधों के क्रय आदेश निरस्त कर दिए जाएं, लेकिन पौधे अगर नर्सरी से निकल चुके हैं तो ले लें। 
19 जुलाई: विभाग ने एक साथ 5 नए आदेश निकाले। इसमें सीहोर, दमोह, हरदा, सिवनी, अलीराजपुर और होशंगाबाद के लिए पौधे खरीदी के आदेश में बदलाव किया। ये पौधे सरकारी नर्सरियों से लेने को कहा गया। 
20 जुलाई: उद्यानिकी मंत्री सूर्यप्रकाश मीणा ने नोटशीट में लिखा एक करोड़ पौधे खरीदी के लक्ष्य के हिसाब से ही शत-प्रतिशत खरीदी की जाए। प्रमुख सचिव के पास से यह फाइल आयुक्त तक आई। 
23 जुलाई: आयुक्त सत्यानंद ने मंत्री की शत-प्रतिशत खरीदी वाली नोटशीट को आधार बनाकर दोबारा खरीदी को हरी झंडी दे दी गई। 
24 जुलाई: 14 नर्सरी से खरीदी के निर्देश दिए। दमोह की सचदेव नर्सरी को भी खरीदी वाली सूची में शामिल कर लिया गया। 
25 जुलाई: पीएस का आदेश- किसानों को आधार कार्ड, खसरा, बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर और फोटो देने पर ही पौधे दिए जाएं। निजी नर्सरी से खरीदे पौधे मानक के हिसाब से हो तो ही किसानों को बाटे जाए। यह भी तय हो कि निजी नर्सरी से लगे पौधे 90 दिन तक जिंदा रहने पर ही भुगतान करें। 
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