IAS जुलानिया के सामने गिड़गिड़ाए जूडा, 'SORRY' लिखकर दिया | MP NEWS

28 July 2018

भोपाल। अंतत: चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया की जीत हुई और 4 दिन से हड़ताल कर रहे जूनियर डॉॅक्टरों को काम पर वापस लौटना ही पड़ा। इतना ही नहीं जूनियर डॉॅक्टरों को लिखकर देना पड़ा कि यह हड़ताल उनकी गलती थी और आगे से वो ऐसा नहीं करेंगे। इस बार जुलानिया ने जूनियर डॉॅक्टरों पर ऐसा शिकंजा कसा था कि यदि माफी नहीं मांगते तो सबका करियर बर्बाद होना तय था। चिकित्सा शिक्षा के इतिहास में आईएएस राधेश्याम जुलानिया की ट्रिक को हमेशा याद रखा जाएगा। 

कुछ मामूली की मांगों को पूरा करने की जिद थाने जूनियर डॉक्टरों ने बेवजह हड़ताल जैसा गंभीर कदम उठा लिया था। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के कारण हजारों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा जबकि मध्यप्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में करीब एक दर्जन मरीजों की मौत हुई। एक इंसान की जान से ज्यादा जरूरी कोई मांग नहीं हो सकती, लेकिन फिर भी जूनियर डॉक्टर अपनी जिद पर अड़े थे। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया ने उन्हे मिलने बुलाया लेकिन वो अपनी मांग पर अड़े रहे और जुलानिया से नाराज होकर सामूहिक इस्तीफे दे डाले। इसके बाद जुलानिया ने वो किया जो उनकी कुर्सी पर मौजूद अधिकारी को करना चाहिए था। 

शाम करीब 7 बजे चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया के साथ जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन की बैठक हुई। चार इमली स्थित जलसंसाधन विभाग के दफ्तर में आयोजित बैठक में एसोसिएशन के सदस्यों ने एसीएस से कहा - सर गलती हो गई माफ कर दीजिए। इस पर एसीएस ने कहा कि पहले लिखकर दो-आगे गलती नहीं होगी। इस पर जूनियर डॉक्टर्स ने कहा कि सर लिखकर देने को भी तैयार हैं लेकिन निष्कासित किए गए डॉक्टर्स का क्या होगा। इस पर एसीएस ने कहा-डरो मत कुछ नहीं होगा। सुबह काम पर लौटो और दोपहर में निष्कासित किए गए आॅर्डर को बहाल कर दिया जाएगा। 

ऐसा क्या किया जुलानिया ने
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल की स्टेटस रिपोर्ट सरकार ने शुक्रवार शाम को हाईकोर्ट में सबमिट कर दी है। इसमें सरकार ने हाईकोर्ट को बताया है कि 24 जूनियर डॉक्टर्स को निष्कासित कर दिया गया है। इसमें से ही 19 के रजिस्ट्रेशन एमपीएमसीआई ने 7 दिन के लिए सस्पेंड कर दिए हैं। शेष 300 से ज्यादा जूनियर डॉक्टर्स को नोटिस दिया गया है। 
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