PEB: 100 में से -4.91 नंबर, ये कैसा नॉर्मलाइजेशन | MP NEWS

Tuesday, April 3, 2018

भोपाल। मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह सरकार चुनावी साल में नौकरियां बांट रही है। सीएम शिवराज सिंह ने 89 हजार भर्तियां किए जाने का ऐलान किया है लेकिन सवाल यह है कि प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड के नॉर्मलाइजेशन सिस्टम के चलते कैसे यकीन कर लें कि सबकुछ फेयर होगा। पटवारी परीक्षा में नॉर्मलाइजेशन के बाद अजीब तरह के नतीजे सामने आए हैं। एक छात्रा के तो 100 में से -4.91 नंबर आए हैं। अब बताइए, 00 से नीचे भी परीक्षा परिणाम आ सकता है क्या जबकि परीक्षा में माइनस मार्किंग नहीं थी। 

छात्रा का नाम SUBI SHARMA है। रोल नंबर 782979398 और जन्म की तारीख 15/06/1996 है। पीईबी की बेवसाइट peb.mp.gov.in पर जाकर आप खुद परीक्षा परिणाम देख सकते हैं। इस मार्कशीट की कॉपी सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है। छात्रा पढ़ने में होशियार है। यदि इतनी ही डफर होती तो ग्रेजुएशन कैसे कर लिया होता। फिर भी मान लेते हैं कि उसने सभी सवालों के जवाब गलत दिए। ऐसी स्थिति में भी नंबर 00 आने चाहिए थे, -4.91 कैसे हो गए। 

पीईबी और शिवराज सिंह सरकार ने नॉर्मलाइजेशन सिस्टम लागू करने से पहले उम्मीदवारों की सहमति नहीं ली। यहां तक कि उन्हे जागरुक भी नहीं किया। 90 प्रतिशत से ज्यादा उम्मीदवार नॉर्मलाइजेशन सिस्टम के खिलाफ हैं बावजूद इसके परीक्षा नियंत्रक भदौरिया का कहना है कि उन्हे कोई फर्क नहीं पड़ता। सवाल यह है कि क्या सरकार को भी कोई फर्क नहीं पड़ता। पटवारी परीक्षा में करीब 9000 लोगों को नौकरी दी परंतु 9 लाख उम्मीदवार सरकार से नाराज हो गए। ये थोकबंदी नाराजगी लेने का कारण क्या है। क्या कोई लालच है जो सरकार को युवाओं का विरोध देखने नहीं दे रहा। 

फिर एक साथ बड़ी संख्या बुलाने की साजिश
प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड परीक्षाओं का कुछ इस तरह से आयोजित कर रहा है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या आए और पेपर एक दिन में कंडक्ट कराना मुश्किल हो जाए। क्या संदेह नहीं किया जाना चाहिए कि यह एक साजिश है। हर हाल में नॉर्मलाइजेशन सिस्टम को लागू करन की साजिश। बोर्ड को यह सार्वजनिक करना चाहिए कि वो कैसे तय करता है कि कौन सा पेपर कितना कठिन था और यह सभी पेपर समान रूप से कठिन क्यों नहीं बनाए जाते। कुछ सरल कुछ कठिन क्यों होते हैं। 

सरल पेपर में तो कोई टॉप ही नहीं कर पाएगा
दरअसल, नॉर्मलाइजेशन सिस्टम की नींव ही गलत है। वो कठिन पेपर देने वाले उम्मीदवारों के हित का संरक्षण करता है परंतु जिन उम्मीदवारों को सरल पेपर मिल जाता है उसके साथ अन्याय होता है। पीईबी के नॉर्मलाइजेशन सिस्टम के चलते जितने भी उम्मीदवारों को सरल पेपर मिले वो कभी टॉप नहीं कर पाएंगे, क्योंकि वो कितने भी टेलेंटेड क्यों ना हों, नॉर्मलाइजेशन सिस्टम के कारण 100 में से 99 कभी नहीं ला पाएंगे। 

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