बैंक घोटाले: बचाव नहीं उपाय बताईये सरकार ! | EDITORIAL

21 February 2018

राकेश दुबे@प्रतिदिन। पंजाब नेशनल बैंक घोटाले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप है और विपक्ष लगातार हमलावर रहा है। कल देर शाम वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी और इस घोटाले के लिए ऑडिटर्स और बैंक प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया। सरकार और बैंक अपने दामन को पाक-साफ साबित करने के लिए इसकी कई स्तरों पर जांच करा रही है, लेकिन जैसे-जैसे घोटाले की जांच आगे बढ़ रही यह मामला उलझता ही जा रहा है। पहले यह घोटाला 11,300 करोड़ रुपये का आंका जा रहा था लेकिन अब यह अनुमान से दोगुना बढ़कर 20000 करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गया है। इसकी आंच देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई, यूनियन बैंक, इलाहाबाद बैंक और यूको बैंक पर भी देखी जा रही हैै। सरकार की दलील है कि यह घोटाला 2011 में शुरू हुआ था और तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी। इस बयान को हास्यास्पद ही कहा जाएगा। केंद्र में पिछले पौने चार साल से एनडीए की सत्ता है और यह सरकार किसी भी सूरत में इस घोटाले से अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती है।

उस आडिट की बलिहारी है कि जब किसी आम ग्राहक के खाते में जमा रकम निर्धारित न्यूनतम सीमा से कम हो जाती है तो बैंक को उसका तुरंत पता चल जाता है और ग्राहक से अनाप-शनाप जुर्माना भी वसूल लिया जाता है। ऐसे में सवाल  उठता है कि हीरा व्यापारी नीरव मोदी पिछले सात साल से पीएनबी से अवैध तरीके से मनचाही रकम लेता रहा और किसी को कानों-कान खबर कैसे नहीं लग पाई ? पीएनबी एक सूचीबद्ध कंपनी है, इसकी हर तिमाही बैलेंस शीट बनती है और इसका नियमित रूप से आडिट भी किया जाता है। इस स्थिति में घोटाले की भनक न लगने की बात पर किसी भी सूरत में भरोसा नहीं किया जा सकता।

पीएनबी के लिए नीरव मोदी प्रकरण कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले हीरा कारोबार से जुड़ी कंपनियां विनसम और श्री गणोश ज्वेलर्स बैंक को 9000 करोड़ रुपये की चपत लगा चुकी हैं। पीएनबी ने इन घटनाओं से सबक लिया होता तो आज उसे पूंजी बाजार में यह फजीहत नहीं झेलनी पड़ती। हकीकत यह है कि पीएनबी का डूबा हुआ कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है।

बैंक के जानबूझ कर कर्ज न लौटाने वाली राशि में पिछले महज छह महीने में ही 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हो चुकी है। इससे साफ संकेत मिलता है, इस बैंक के सिस्टम में ही गलती है इस बीमारी से अन्य सार्वजनिक बैंक भी अछूते नहीं है। इसी वजह से इन बैंकों की फंसे कर्ज की राशि तेजी से बढ़ रही है। सरकार को इस मुद्दे पर बचाव की मुद्रा में आने के बजाय असल बीमारी के इलाज के उपाय करने चाहिए।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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