जाति प्रमाण पत्र रद्द फिर भी धड़ल्ले से चल रही है नौकरियां | BALAGHAT MP NEWS

Monday, February 5, 2018

आनंद ताम्रकार/बालाघाट। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जुलाई 2017 में दिये अपने अहम फैसले में आदेषित किया था की अनुसूचित जाति और जनजाति के फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर शासकीय नौकरी पाने वालों को नौकरी से बाहर निकाल दें लेकिन मध्यप्रदेश सरकार द्वारा इस फैसले के आधार पर कोई रीति नीति ना बनाये जाने के कारण फर्जी जाति प्रमाण के आधार पर नौकरी पाने वाले प्रदेश में अभी भी नीचे से लेकर उच्च पदों पर सेवारत है, इस फैसले का उन पर कोई प्रभाव नही पडता दिखाई दे रहा है। 

फर्जी जाति प्रमाण पत्र के बनवाने और उन्हें शासकीय सेवा सुलभ कराये जाने के लिये प्रदेश में एक गिरोह सक्रिय है जो भोपाल जिले की हुजूर तहसील से फर्जी जाति के प्रमाण पत्र बनवाने में संलग्न है। बालाघाट जिले में निवासरत अनेक लोगों ने हुजूर तहसील में जाकर फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाये और शासकीय नौकरी प्राप्त कर ली ऐसे लोगों उच्च पदों पर पदस्थ है। सचिवालय से लेकर नीचे स्तर तक भारी तादात में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिये सरकारी सेवा में लग चुके है।

अकेले बालाघाट जिले में ही 250 से लेकर 400 लोगों के द्वारा जिले में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिये नौकरी करने की जानकारी प्राप्त हुई है। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक श्री गौरव तिवारी के कार्यकाल के दौरान फर्जी जाति प्रमाण पत्र के माध्यम से शासकीय नौकरी प्राप्त कर लेने वाले लगभग 96 व्यक्तियों की सूची उपसचिव गृह को अग्रिम कार्यवाही किये जाने हेतु प्रेषित की गई थी लेकिन आज तक उस सूची के आधार पर किसी तरह की कार्यवाही किये जाने की जानकारी नही है।

जिला कलेक्टर की ओर से 2 वर्षों के अंदर लगभग 40 ऐसे लोगों के जाति प्रमाण पत्र रद्द कर दिये गये है जिन्होने फर्जी तरीके से जाति प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी नौकरी प्राप्त कर ली है। इनमें से ज्यादातर लोग अभी भी शासकीय सेवा में लगे हुये है फर्जी जाति प्रमाण पत्र रद्द हो जाने के बाद भी ये शासकीय सेवा में कैसे लगे हुये है ये सोचनीय प्रश्न है?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश जारी होने के बाद छत्तीसगढ शासन में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने वाले लगभग 115 लोगों को सितम्बर 2017 में सरकारी सेवा से बरखास्त कर दिया गया और उनके विरूद्ध आपराधिक प्ररकण दर्ज किये जाने की प्रक्रिया चल रही है। मध्यप्रदेश शासन को भी सूप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश के आधार पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र से शासकीय नौकरी करने वालों के विरूद्ध तत्परता से छानबीन करवाकर उन्हें सरकारी सेवा से बेदखल करते हुये उनके विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिये। 

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