रतलाम में बांध के कारण 40 रिश्ते टूट गए | RATLAM NEWS

28 February 2018

रतलाम। जिले की करण नदी पर बनने वाले डेम का सर्वे शुरू होते ही क्षेत्र के आदिवासी परिवारों के रिश्ते टूटने लगे हैं। सगाई तोड़ लड़की वाले परंपरानुसार ली गई राशि भी लौटा रहे हैं। तर्क यह कि गांव डूब जाएगा, जमीन नहीं बचेगी तो ऐसी जगह बेटी देने से क्या फायदा। तीन ग्राम पंचायतों के डेढ़ दर्जन गांवों के 30-40 आदिवासी परिवारों के युवाओं की सगाई लड़की वालों ने तोड़ दी है।

सैलाना विधानसभा क्षेत्र के राजपुरा माताजी क्षेत्र की पहाड़ियों के बीच करण नदी पर बांध बनाने की योजना स्वीकृति के बाद सर्वे प्रारंभ हो गया है। बांध बनने से तीन ग्राम पंचायतों के करीब 18 गांव के लोगों की जमीन डूब में जाएगी। इन गांवों की आबादी 15 हजार से अधिक है। सभी गांव नदी किनारे पहाड़ियों के बीच बसे हैं। डूब में आने वाली जमीन आदिवासी किसानों की है। इससे उनमें हड़कंप मचा हुआ है।

जो सगाई टूटी हैं, उनमें से अधिकांश की होली के बाद शादी होने वाली थी। आदिवासी परंपरा के अनुसार रिश्ता तय होने पर लड़की वाले लड़के वालों को कुछ राशि देते हैं। जानकारी के अनुसार डूब वाले गांवों में लड़की वाले ली गई राशि से दोगुनी राशि लौटा कर रिश्ता तोड़ रहे हैं। न्यूनतम 10 हजार और अधिकतम 30 हजार रुपए लड़के वालों ने लड़की पक्ष को दिए थे।

विरोध प्रदर्शन
ग्रामीणों का आरोप है कि पांचवीं अनुसूचि में शामिल होने के बावजूद बिना ग्राम सभा की सहमति के बांध की योजना स्वीकृत कर दी गई है, जबकि प्रशासन का कहना है कि इसके कोई प्रमाण नहीं है। बांध का सर्वे शुरू होते ही आदिवासियों ने विरोध शुरू कर दिया है। दो बार वे प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं। उधर, जल संसाधन विभाग का कहना है कि केवल 8 गांवों की आंशिक जमीन जाएगी। इसके बदले में ग्रामीणों को सिंचाई के साथ पेजयल भी मिलेगा।

इन गांवों की जमीन जाएगी
ग्राम पंचायत डूंगरापूजा, चिकनी, राजपुरा माताजी के अंतर्गत आने वाले गांवों के अलावा सोनारी, छावनीछोर्डिया, केलदा, देवीगढ़ शामिल है।

7 हजार हेक्टेयर में हो सकेगी सिंचाई
राजपुरा माताजी क्षेत्र में करण नदी पर 250 करोड़ की लागत से बांध बनेगा। सर्वे लगभग पूरा हो चुका है। एक साल में डीपीआर भी तैयार हो जाएगी। बांध की ऊंचाई लगभग 34 मीटर होगी,इससे 7 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा। पेयजल उपलब्ध के लिए भी बांध का पानी मिलने संभावना है।

दोगुना मुआवजा मिलेगा
शासन से स्वीकृति मिलने के बाद क्षेत्र का सर्वे कराया है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार करीब 8 गांवों की आंशिक जमीन और कुछ मकान जाएंगे। शासन की गाइड लाइन अनुसार 2 गुना मुआवजा दिया जाएगा। पांचवीं अनुसूची में क्षेत्र शामिल होने के कोई दस्तावेज नहीं हैं।
एचके मालवीया, कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन विभाग

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