राज्यपाल आनंदीबेन स्वागत, कुलाधिपति तो यहाँ कई हैं | EDITORIAL

Updesh Awasthee
राकेश दुबे@प्रतिदिन। मध्यप्रदेश के राज्यपाल के रूप में आपका ह्रदय से स्वागत है। आपकी जानकारी में आपका सचिवालय यह तथ्य तो अब तक ला ही चुका होगा कि आप प्रदेश के विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति भी हैं। सरकार द्वारा स्थापित विश्वविद्यालयों के अतिरिक्त प्रदेश में 26 PRIVET UNIVERSITY भी है, जिनमे आपके पद के समतुल्य कुलाधिपति विद्यमान हैं। इसके अतिरिक्त 4 निजी विश्वविद्यालय तो कुलाधिपति विहीन हैं और आधा दर्जन निजी विश्वविद्यालय और खुलने की कगार पर है, जिनके कुलाधिपति विश्वविद्यालय संभालने को तैयार बैठे हैं। समय- समय पर मीडिया और अन्य सर्वे बताते हैं कि प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा राष्ट्रव्यापी नहीं बन सकी है। जिस तरह शासन द्वारा स्थापित विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता, शेक्षणिक वैशिष्ट्य और प्रबन्धन में कुलाधिपति के रूप में महामहिम राज्यपाल का गरिमामय मार्गदर्शन अपेक्षित होता है, उसी अपेक्षा से निजी विश्वविद्यालयों में कुलाधिपति नाम और ठाठ ले लिए गये। अब यह कुलाधिपति समुदाय क्या कर रहा है, कैसे कर रहा है किसी से छिपा नहीं है।

एक कहावत है “विद्वत्ता का कोई पैमाना नहीं होता”। सरकार में भले ही वय, ज्ञान अनुभव के बाद माननीय राज्यपालों को CHANCELLOR जैसा दायित्व सौंपा जाता है। निजी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति इससे परे हैं। इनमें तो कुलाधिपति परिवार तक स्थापित हो गये हैं। परिवार के सारे सदस्य कुलाधिपति एक शहर में स्थित अलग-अलग विश्वविद्यालयों के। राजनीति का अनुभव प्राप्त कुलाधिपति भी एक दो विश्वविद्यालयों में हैं। बाकी में विश्वविद्यालय स्थापना करने वाली सोसायटी द्वारा मनोनीत। इस मनोनयन का आधार विश्वविद्यालय में वेष्ठित, धन, राजनीति और सोसायटी में पकड़ जैसे गुण हैं। आयकर विभाग से लगभग सबकी दोस्ती दुश्मनी निभा चुकी है। 

INCOME TAX DEPARTMENT  को धन समर्पण के कीर्तिमान भी इन्ही ने स्थापित किये हैं, कुछ ने आवश्यकतानुसार नाम भी बदल लिए हैं। पाठ्यक्रम शुरू होने और बंद होने के कीर्तिमान भी इस प्रदेश में ऐसे कुलाधिपतियों के नाक के नीचे हुए है। मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में प्रवेश  और बिना मान्यता के पाठ्यक्रम भी इन महान विभूतियों के संरक्षण में चले हैं। इनसे इतर एक और विश्वविद्यालय प्रदेश में हैं, जिसके लिए आपकी सरकार को कुलपति नहीं मिल रहा है। आयु सीमा पार कुलपति जी, आगामी आदेश तक बने रहेंगे क्योकि विश्वविद्यालय के नये भवन के वे ही विश्वकर्मा हैं। सरकार द्वारा स्थापित एक और विश्वविद्यालय का उदाहरण भी आपके संज्ञान में होना जरूरी है, जहाँ प्राध्यापको को नियुक्त किये बगैर शोध छात्रों को प्रवेश दे दिया गया। अब नये कुलपति कुछ करें तो करें।

यह सब आपकी जानकारी में लाना इसलिए जरूरी है कि निजी विश्वविद्यालय और शासन द्वारा द्वारा स्थापित विश्वविद्यालयों को आप पटरी पर ला  सकें। व्यापम के बाद उच्च शिक्षा में भी नेकनामी नही है। जरुर विचार कीजिये,आप शासन द्वारा स्थापित विश्वविद्यालयों  की कुलाधिपति हैं तो निजी विश्वविद्यालयों की कुलाध्यक्ष। राज्यपाल जी, पुन: आपका ह्रदय से स्वागत।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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