मप्र: नेताओं का दामन छोड़, 15 लाख कर्मचारियों ने संभाला मोर्चा | MP EMPLOYEE NEWS

15 January 2018

भोपाल। मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने कर्मचारी नेताओं को तो साध लिया है। फायदा यह हुआ कि सड़कों पर कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन (PROTEST) नजर आने बंद हो गए परंतु कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उन्होंने नेताओं का दामन छोड़ SOCIAL MEDIA को अपने विरोध प्रदर्शन का माध्यम बना लिया है। मध्यप्रदेश के 15 लाख कर्मचारी जिनमें 7वें वेतनआयोग के लाभ से वंचित कर्मचारियों का बड़ा वर्ग शामिल है अब सोशल मीडिया के जरिए SHIVRAJ SINGH GOVERNMENT का विरोध कर रहा है। ये कर्मचारी सरकारी नीतियों की आलोचना कर रहे हैं एवं BJP के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। 

पत्रकार शिखिल ब्यौहार की रिपोर्ट के अनुसार सातवें वेतनमान का मामला हो या कर्मचारियों से जुड़े अन्य मुद्दे। ज्यादातर कर्मचारी संगठन, संस्था, मोर्चा और इनके आंदोलनों से दूर ही रहना पसंद करते हैं। इस कारण कर्मचारी आंदोलन, ज्ञापन कार्यक्रमों और बैठकों में अनुपातिक रूप से 10 प्रतिशत ही अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। लेकिन, सातवें वेतनमान के मुद्दे पर तमाम कर्मचारियों में रोष दिख रहा है।

संगठनों से दूरी इसलिए
एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अधिकांश कर्मचारी शासन-प्रशासन और राजनीतिक दलों का सीधा विरोध नहीं करना चाहते। संगठन में जुड़ने से उनका नाम भी सार्वजनिक हो जाता है। साथ ही कार्रवाई, ट्रांसफर, सीआर खराब होने का खतरा पैदा हो जाता है। कुछ कर्मचारी आंदोलनों में विश्वास नहीं रखते और आंतरिक विरोध करते हैं। विंध्याचल भवन में कार्यरत कर्मचारियों का मानना है कि संगठनों द्वारा सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने का काम किया जाता है। मांगों को लेकर सिर्फ नाम मात्र का आंदोलन होता है। इस कारण सतपुड़ा, वल्लभ भवन में होने वाली हड़तालों को पूरा समर्थन कभी नहीं मिला।

यह है आंतरिक विरोध
सीधे तौर पर कर्मचारी बीजेपी सरकार से खफा हैं। इस कारण गुुपचुप तरीके से आगामी चुनाव में बीजेपी को वोट न देने की मुहिम भी चलाई जा रही हैं। इसमें न सिर्फ कर्मचारी का वोट बल्कि पूरे परिवार, रिश्तेदार और मित्रों को भी वोट नहीं देने की बातचीत भी की जा रही हैं। व्हॉट्सएप ग्रुपों और सोशल मीडिया पर ग्रुप बनाकर कर्मचारी विरोधी नितियों से अन्य कर्मचारियों को अवगत कराया जा रहा है।

सातवें वेतनमान से इतने कर्मचारी है वंचित
1-नगर पालिका, निगम और निगम मंडल: 1 लाख 54 हजार
2-ग्रामीण निकायों के 1 लाख 60 हजार
3-पेंशनर्स (जो जीवित हैं): 3 लाख 29 हजार
4-पेंशनर्स की विधवाएं (जिन्हें पारिवारिक पेंशन मिलती है): 1 लाख 52 हजार
5-पंचायत सचिव: 23 हजार
6-ग्रामीण सहकारी समितियों के कर्मचारी: 35 हजार
7-अध्यापक संवर्ग: 2 लाख 50 हजार
8-संविदा कर्मचारी: 2 लाख
9-विश्वविद्यालय कर्मचारी: 8 हजार

चुनाव से पहले दे देंगे 7वां वेतनमान का लाभ
कर्मचारियों को बीजेपी की खिलाफ रणनीति बनाने के स्थान पर अपने काम पर जोर देना चाहिए। हमारी सरकार कर्मचारी हितैषी है। बचे हुए कर्मचारियों को भी जल्द सातवें वेतन मान का लाभ दिया जाएगा। जल्द ही इस नाराजगी को दूर करने का प्रयास भी किया जाएगा 
राहुल कोठारी, प्रदेश प्रवक्ता, बीजेपी

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