मुंगावली में फिर होगा सिंधिया और शिवराज का मुकाबला

Friday, September 22, 2017

भोपाल। मध्यप्रदेश में विधानसभा कप से पहले कई टी-20 भी हो रहे हैं। पिछले दिनों भिंड जिले की अटेर विधानसभा में सिंधिया और शिवराज के बीच टी-20 हुआ था। सन् 57 की कहानी सुनाने के बाद भी टीम शिवराज चित होकर लौटी। अब इससे भी रोचक टी-20 आ रहा है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रमुख सलाहकार महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा के निधन के बाद मुंगावली सीट खाली हो गई है। चित्रकूट के साथ यहां भी उपचुनाव होगा। यह मुकाबला भी सिंधिया और शिवराज के बीच सीधी जंग रहेगा। 

मध्यप्रदेश में चित्रकूट और मुंगावली की दो सीटों पर उपचुनाव होना हैं। चुनाव आयोग जल्द दोनों सीटों पर मतदान की घोषणा कर सकता है। मुंगावली विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह कालूखेड़ा के निधन के बाद ये सीट खाली हुई है। वहीं, चित्रकूट से तीन बार विधायक रहे कांग्रेस नेता प्रेम सिंह के गुजर जाने से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था। 

चित्रकूट में अजय सिंह से भिड़ेंगे शिवराज
चित्रकूट से प्रेम सिंह तीन बार ​कांग्रेस विधायक रहे हैं। सतना विधानसभा क्षेत्र से नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह आते हैं, इस क्षेत्र में उनका अच्छा वर्चस्व माना जाता है। ऐसे में उपचुनाव में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह और शिवराज सिंह के बीच मुकाबला दिखाई देगा। शिवराज सिंह ने अपनी तैयारियां शुरू कर दीं हैं। चित्रकूट के लिए कड़की में चल रही मध्यप्रदेश सरकार ने खजाने खोल दिए हैं। वादों की झड़ी लग गई है। चित्रकूट को दुनिया का सबसे सुन्दर शहर बनाने की बात होने लगी है। इधर अजय सिंह भी अपनी पूरी किट के साथ तैयार हैं। उन्हे दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और सिंधिया का भी सपोर्ट मिलेगा। अजय सिंह के लिए यह सीट उनके राजनैतिक भविष्य के लिए अनिवार्य है। 

मुंगावली में सिंधिया से होगा शिवराज का मुकाबला
मुंगावली विधायक महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा सिंधिया के खाते से आते थे। यह सीट सिंधिया के लोकसभा क्षेत्र में आती है। अत: सिंधिया के लिए अनिवार्य है कि वो मुंगावली को अपने खाते में ही बनाए रखें। यह चुनौती उनकी सीएम कैंडिडेटशिप के लिए भी जरूरी है। भाजपा के पास शिवराज सिंह के अलावा कोई स्टार प्रचारक नहीं है जो सिंधिया से मुकाबला कर सके। प्रभात झा और जयभान सिंह पवैया सिंधिया विरोधी बयान तो देते हैं परंतु मतदाताओं को लुभाकर वोट डालने के लिए प्रेरित कर देने वाला जादू उनके शब्दों में नहीं है। 

कितनी परीक्षाएं देनी पड़ेंगी शिवराज को
यहां सीएम शिवराज सिंह की हालत पलती है। तीसरी पारी की शुरूआत से लेकर अब तक शिवराज सिंह का ज्यादातर समय घोटाला वाले आरोपों से बचने और उपचुनाव लड़ने में ही बीता है। भाजपा के पास कोई दूसरा चेहरा नहीं है जो शिवराज सिंह के बिना चुनाव जिता सके। हालात यह हैं कि नगरीय निकाय के चुनावों में भी भाजपा ने शिवराज सिंह को झौंक दिया था। चुनाव कैसा भी हो, प्रत्याशी कोई भी हो लेकिन मुकाबला शिवराज सिंह को ही करना पड़ता है। अटेर में वो सिंधिया के हाथों हारकर लौट चुके हैं। चित्रकूट पहले से ही तनाव दे रही थी अब मुंगावली भी आ गई है। सवाल यह है कि सारी परीक्षाएं शिवराज सिंह की ही क्यों। एकाध टी-20 में कप्तान बदलकर भी तो देखो। 

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