बेवजह के स्पीड ब्रेकर

Wednesday, October 19, 2016

राकेश दुबे@प्रतिदिन। सारे विश्व में एक चिंता और चर्चा का विषय है कि पैदल चल रहे लोगों और तरह-तरह की गति से चलने वाली गाड़ियों को दुर्घटनाओं से कैसे बचाया जाए? भारत में तो अन्य विषयोंकी तरह यह विषय भी अदालत में भेज दिया गया है। वैसे यह हमेशा ही एक बड़ी चुनौती रही है, कम से कम तेज रफ्तार गाड़ियों के आने के बाद से तो रही ही है। इसका एक समाधान यह निकाला गया था  कि जहां दुर्घटना का खतरा ज्यादा हो, वहां स्पीड ब्रेकर बना दिया जाए। यानी एक ऐसी बाधा, जो चालकों को अपने वाहन की रफ्तार कुछ कम करने को मजबूर कर दे। वैसे यह कोई नई चीज नहीं है। इसका पहली बार प्रयोग 1906 में अमेरिका के न्यू जर्सी में हुआ था। वहां इसे स्पीड बंप कहा जाता है। अब ये लगभग हर जगह इस्तेमाल होते हैं। बल्कि कई बार तो लगता है कि ये कुछ जरूरत से ज्यादा ही इस्तेमाल होते हैं।

हमारे यहां परेशानी इसी बात को लेकर है कि इनका इस्तेमाल जरूरत से कुछ ज्यादा और काफी बेतरतीब ढंग से हो रहा है। अभी तक स्पीड ब्रेकर के निर्माण का काम स्थानीय निकायों या लोक निर्माण विभाग के हवाले होता था, लेकिन जब से प्लास्टिक के बने सस्ते स्पीड ब्रेकर बाजार में उपलब्ध हुए हैं, लोग अपने घर के बाहर गली तक में इसे लगा लेते हैं। नतीजा यह है कि जो स्पीड ब्रेकर दुर्घटना रोकने के लिए बने थे, वे दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि देश में २२ प्रतिशत दुर्घटनाएं स्पीड ब्रेकर के कारण हुई हैं। एक साल में ऐसी कुल ११०८४ दुर्घटनाओं में ३४०९ लोग हताहत हुए हैं। अकेले राजधानी दिल्ली में ऐसी ४१ दुर्घटनाओं में २७ लोग घायल हुए, जबकि छह को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। यह भी पाया गया है कि बहुत सी दुर्घटनाएं सिर्फ इसलिए हुईं, क्योंकि स्पीड बे्रकर बनाने में उन मानकों का पालन नहीं हुआ, जिन्हें भारतीय रोड कांग्रेस ने स्पीड ब्रेकर बनाने के लिए तय कर रखा है।

जैसे कई जगह स्पीड ब्रेकर को तिरछी काली व पीली पट्टियों से रंगा नहीं गया और स्पीड बे्रकर से पहले सड़कों पर स्पष्ट चेतावनी के संकेत भी नहीं लगाए गए। अब दिल्ली उच्च न्यायालय ने आदेश दिया है कि स्पीड ब्रेकर से कम से कम पांच सौ मीटर पहले उसकी चेतावनी के संकेत लगाए जाएं, साथ ही गैर-कानूनी रूप से बनाए गए स्पीड ब्रेकर हटाए जाएं। जबकि ऐसी भी सड़कें और गलियां हैं, जिनकी पूरी लंबाई 500 मीटर भी नहीं है और उन पर चार जगह स्पीड ब्रेकर बने हैं। अदालत का आदेश आ जाने का अर्थ यह नहीं है कि लोगों को तुरंत ही इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी। दो महीने पहले केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया था कि वे राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने स्पीड बे्रकर को हटाएं, लेकिन अभी तक ऐसे ज्यादातर स्पीड ब्रेकर बने हुए हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश कोई नई बात नहीं कह रहा है, वह सिर्फ इतना ही कह रहा है कि मानकों का पालन किया जाए और जो गैर-कानूनी हैं, उन्हें हटाया जाए। दुर्भाग्य यह है कि अपने देश में ऐसी बात के लिए भी  न्यायालय को अपना समय बर्बाद करना पड़ता है।
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।        
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
पूर्व में प्रकाशित लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए
आप हमें ट्विटर और फ़ेसबुक पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

SHARE WITH YOU FRIENDS

-----------

CHOOSE YOUR FAVOURITE NEWS CATEGORY | कृपया अपनी पसंदीदा श्रेणी चुनें

mgid

Loading...

Popular News This Week

 
Copyright © 2015 Bhopal Samachar
Distributed By My Blogger Themes | Design By Herdiansyah Hamzah