किस हद तक गिरेंगे आप

Sunday, September 4, 2016

डॉ नीलम महेंद्र। एक बहुत ही खूबसूरत बगीचा था, माली की नज़र बचाकर कुछ बच्चे रोज फूल तोड़ लेते थे। एक दिन माली ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। अब उनमें से सबसे बुद्धिमान एक बालक ने सोचा कि खुद को बचाना है तो आक्रमण करना चाहिए और वह चिल्लाने लगा कि अगर फूलों से खेलने ही नहीं देना तो बगीचे में लगाए ही क्यों हैं ? क्या सिर्फ हमें चिढ़ाने के लिये ? और वैसे भी हम फूल तोड़े न तोड़े वे तो मुरझाँएगे ही कम से कम हमने उनका उपयोग तो किया। वे किसी के काम तो आए! इन तर्कों को सुन कर माली सतब्ध रह गया!

आज देश में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। आप के पूर्व विधायक संदीप कुमार की सीडी के सामने आने के बाद जिस प्रकार अपने बचाव में उन्होंने स्वयं के दलित होने को कारण बताया है और जिस प्रकार आशुतोष उनके बचाव में आगे आए हैं वह पूरे देश के लिए बेहद शर्म और अफसोस का विषय है। शर्म इसलिए कि हमारे राजनेता अपनी गलतियों को मानकर पश्चाताप एवं सुधार करने के बजाय कुतर्कों द्वारा उन्हें सही ठहराने में लग जाते हैं। 

अफसोस इसलिए कि चुनाव विकास एवं भ्रष्टाचार के नाम पर लड़ते हैं और समय आने पर जाति को ढाल बनाकर पिछड़ेपन की राजनीति का सहारा लेते हैं। कितने शर्म की बात है कि अपने अनैतिक आचरण को आप भारत की राजनीति के उन नामों के पीछे छिपाने की असफल कोशिशों में लगे हैं जिन नामों को भारत ही नहीं बल्कि विश्व में पूजा जाता है। यह मानसिक दिवालियापन नहीं तो क्या है कि जिन गाँधी जी से आप तुलना कर रहे हैं उनके सम्पूर्ण जीवन से आपको सीखने योग्य कुछ नहीं मिला?  

जी हाँ आप सही कह रहे हैं जिस प्रकार हम खाते हैं, पीते हैं,साँस लेते हैं उसी प्रकार कुछ अन्य शारीरिक क्रियाएँ भी होती हैं उनको इस प्रकार अजूबा बनाकर पेश नहीं किया जाना चाहिए लेकिन आप शायद भूल रहे हैं कि पहली बात तो यहाँ बात मानव जाति की हो रही है और दूसरी बात एक सभ्य समाज की हो रही है। जहाँ एक सभ्य मनुष्य से एक सभ्य एवं नैतिक आचरण की अपेक्षा की जाती है। कुछ सामाजिक नियमों के पालन की उम्मीद की जाती है। मानव की  आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर और उसे पशु से भिन्न मानने के कारण ही भारतीय संस्कृति में विवाह नामक संस्था को स्वीकार किया गया है। पुरुष और महिला की गरिमा को बनाए रखना किसी भी सभ्य समाज का सबसे बड़ा दायित्व होता है।

आशुतोष जी का कहना है कि मियाँ बीवी राजी तो क्या करेगा काज़ी ? सबकुछ आपसी रजामंदी से हुआ लेकिन उनकी यह दलील भी खोखली सिद्ध हो गयी जब वह महिला थाने में संदीप के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने पहुंची और संदीप गिरफ्तार कर लिए गए। इससे भी अधिक आश्चर्यजनक यह है कि संदीप की पत्नी ॠतु उनके समर्थन में आगे आई हैं और इस पूरे प्रकरण को एक राजनैतिक साजिश करार दिया है। जब व्यक्ति सत्ता सुख एवं भौतिकता की अंधी दौड़ का हिस्सा बना जाता है तो सही गलत स्वाभिमान अभिमान सत्य असत्य कहीं पीछे छूट जाते हैं।

जब आप सार्वजनिक जीवन में होते हैं तो दुनिया की निगाहें आपकी तरफ होती हैं। जिन लोगों के कीमती वोटों के सहारे आप सत्ता के शिखर तक पहुचते हैं उनकी निगाहें आपकी ओर उम्मीद एवं आशा से देख रही होती हैं। यह अत्यंत ही खेद का विषय है कि जिस कुर्सी पर बैठकर हमारे नेताओं को उससे उत्पन्न होने वाली जिम्मेदारी एवं कर्तव्य का बोध होना चाहिए आज वह कुर्सी की ताकत और उसके नशे में चूर हो जाते हैं। जो नेता आम आदमी से उसकी नैय्या का खेवनहार बनने का सपना दिखाकर वोट माँगते हैं वही नेता कुर्सी तक पहुंचने के बाद उस आम आदमी की जरूरत पर उसका शोषण करते हैं। एक राशन कार्ड बनवाने जैसी मामूली बात भी एक महिला के शोषण का कारण बन सकती है। धिक्कार है ऐसे समाज पर जहां ऐसा होता है और उससे भी अधिक धिक्कार है उन लोगो पर जो ऐसे घृणित आचरण को उचित ठहराते हैं।

SHARE WITH YOU FRIENDS

-----------

CHOOSE YOUR FAVOURITE NEWS CATEGORY | कृपया अपनी पसंदीदा श्रेणी चुनें

mgid

Loading...

Popular News This Week

 
Copyright © 2015 Bhopal Samachar
Distributed By My Blogger Themes | Design By Herdiansyah Hamzah