भोपाल। शायद मप्र पुलिस अब यह कहना चाहती है कि हम बिहार से कम नहीं। डिंडोरी में पुलिस ने एक व्यक्ति की मृत्यु के 2 साल बाद, उसके खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने का मामला दर्ज किया। जांच की, गवाहों के बयान लिए, आरोपी को जमानत दी और चालान कोर्ट में पेश कर दिया। राज तो तब खुला जब मृतक की पत्नी डेथ सर्टिफिकेट के साथ कोर्ट में हाजिर हुई।
जानकारी के मुताबिक, 21 मई 2014 को गोपालपुर पुलिस चौकी क्षेत्र के तरवर टोला में पिकअप वाहन नंबर (CG 10 C-1204) से सड़क दुर्घटना हुई थी। पुलिस ने रंगी सिंह पुषाम चालक के नाम पर लापरवाही से वाहन चलाने के अपराध में आईपीसी की धारा 279 और 337 के तहत केस दर्ज किया, फिर पुलिस ने जांच की, आरोपी की जमानत ली, गवाहों के बयान भी दर्ज किए और चालान को न्यायालय में पेश कर दिया। मामले में पेंच तब फंसा जब आरोपी पेश नहीं हुआ। कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया, लेकिन पता चला कि आरोपी बनाए गए रंगी सिंह पुषाम की मौत 13 अक्टूबर 2012 में हो चुकी है।
पति की मौत का सदमा झेल रही कुसुमकली को झटका तब लगा, जब उसे पता चला की उसके मृत पति के खिलाफ भी पुलिस ने अपराध दर्ज कर लिया है। इसके बाद क्षेत्र के दौरे में आई जनपद अध्यक्ष रंजीता धुर्वे को जब मामले की जानकारी लगी, तो उन्होंने कुसुमकली को हिम्मत दी और उसको न्याय दिलाने के लिए साथ में न्यायालय पहुंच गईं। जिला एवं सत्र न्यायालय के वकील अशरद सिद्दकी ने बताया कि, पुलिस ने लापरवाही पूर्वक कार्रवाई की है, जो कि धारा 166 (क) और (ख) के तहत दोषपूर्ण है।
