मोदी की मार्केटिंग: भारतीयों पर टैक्स बढ़ा दोगुनी कमाई कर ली

Updesh Awasthee
भोपाल। इसे आप मोदी सरकार की मार्केटिंग स्ट्रेटजी भी कह सकते हैं। पेट्रोल के दाम घटने पर सरकार को घाटा होना चाहिए था, सरकार ने टैक्स बढ़ा दिए, लोगों को लगा कि सरकार अपना घाटा पूरा करने के लिए ऐसा कर रही है परंतु जब वित्तीय वर्ष समाप्त हुआ और आंकड़े सामने आए तो पता चला कि संकट के समय में सरकार ने आपकी जेब काटकर दोगुनी कमाई कर ली। सरकार ने इस कदर टैक्स बढ़ाए कि सरकारी खजाने में जमा रकम पिछले साल की तुलना में 80.14 फीसदी ज्यादा हो गई। आपको इस अतिरिक्त टैक्स की चपत तो लगी ही, साथ ही डीजल के दामों में कमी ना हो पाने के कारण महंगाई का ग्राफ भी नीचे नहीं गया। आपकी सब्जी भाजी से लेकर लक्झरी कारों तक हर चीज जो सस्ती हो जानी चाहिए थी, नहीं हुई और आपकी जेब​ हर कदम पर कटती रही। 

वित्तीय वर्ष 2015-16 में सरकार को पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) की वसूली से 1,98,793.3 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ जो इसके पिछले साल की तुलना में करीब 80.14 फीसदी अधिक है। मध्यप्रदेश के नीमच निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत यह जानकारी हासिल हुई है। 

नई दिल्ली स्थित केंद्रीय उत्पाद शुल्क और सीमा शुल्क विभाग के आंकड़ा प्रबंधन निदेशालय की ओर से आरटीआई के तहत गौड़ को एक जून को भेजे गये जवाब में बताया गया कि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2014-15 में पेट्रोलियम उत्पादों पर 1,10,354 करोड़ रुपये की एक्साइज ड्यूटी वसूली थी।

इसका साफ मतलब है कि सरकार पेट्रोलियम उत्पादों पर लगातार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर जनता की जेब में पैसा ना पहुंचाकर अपना खजाना भरने में लगी हुई है। वर्ना अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों के इतने सस्ते होने के बावजूद भी घरेलू दाम कम ना होने के पीछे और क्या कारण हो सकता है ? सरकार एक्साइज ड्यूटी लगातार बढ़ाकर जनता को इसका असली फायदा नहीं पहुंचने दे रही है।

आरटीआई के तहत मिले पिछले 5 सालों के सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें, तो पता चलता है कि वित्तीय वर्ष 2011-12 के मुकाबले में वित्तीय वर्ष 2015-16 में पेट्रोलियम उत्पादों पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी का राजस्व संग्रह 166.12 फीसदी बढ़ चुका है। वित्तीय वर्ष 2011.12 में पेट्रोलियम उत्पादों पर केंद्रीय एक्साइज ड्यूटी की वसूली से सरकारी खजाने में 74,701 करोड़ रुपये जमा हुए थे। इसके बाद से इस अप्रत्यक्ष कर के राजस्व में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

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