भोपाल। वन प्रमुख पद के दावेदारों की योग्यता पर सवाल खड़ा करके सुर्खियों में आए आईएफएस अफसर व अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक आजाद सिंह डबास ने अब नए विवाद को हवा दे दी है। सीनियर आईएफएस अफसर की शिकायत पर मिले नोटिस का जवाब देने के बजाए डबास ने वन विभाग और सरकार से ही कुछ सवाल पूछ लिए हैं। डबास को नोटिस का जवाब देने के लिए 15 दिन की मोहलत दी गई थी, जो छह जून को पूरी हो गई।
लिहाजा छह जून को ही उन्होंने वन प्रमुख और शासन को पत्र लिखकर कुछ जानकारियां मांग ली हैं। कुछ दिन पहले वन प्रमुख में नई पदस्थापना को लेकर डबास ने सवाल खड़े किए थे। इसके बाद उनके खिलाफ दो मामलों में इंक्वायरी प्रारंभ हुई। एक में तो उन्हें नोटिस मिल गया। दूसरे मसले में डबास द्वारा सागर सीसीएफ रहते समय लिखी गई एसीआर को वन विभाग ने शून्य कर दिया था।
डबास ने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव इकबाल सिंह बैंस से लेकर सबको पत्र लिख दिया कि उन्होंने भ्रष्ट, अनुशासनहीनता करने वाले और अक्षम-कामचोर लोगों की एसीआर लिखी थी। इसे नेचुरल जस्टिस के विरुद्ध गुपचुप तरीके से शून्य किया गया। इसका लाभ कुछ डिप्टी रेंजरों को मिलेगा। इसलिए जब तक पूरे प्रकरण का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक रेंजरों के पद पर पदोन्नति के लिए डीपीसी की बैठक न की जाए। इन्हीं भ्रष्ट, अक्षम, कामचोर लोगों ने झूठी शिकायतें की, जिसके आधार पर मुझ पर कार्यवाही करने की तैयारी की जा रही है।
घूस के आरोपी IFS अफसर का केस बंद
55 लाख रुपए की घूस लेने के आरोप में चर्चा में आए जबलपुर सीसीएफ रहे आईएफएस अफसर अजीत श्रीवास्तव का केस लोकायुक्त ने बंद कर दिया है लेकिन ऑडियो टेप के आधार पर विभाग द्वारा की गई जांच कार्यवाही अभी प्रक्रिया में हैं। जबलपुर के टिंबर कारोबारी अशोक रंगा ने शिकायत लोकायुक्त में की थी।
