रामगोपाल सिंह राजपूत/भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट छात्रों के लिए चैलेंज में बदलाव करने जा रहा है। इसके तहत दस फीसदी अंक की बाध्यता को खत्म किया जा रहा है। इससे चैलेंज के दौरान यदि छात्र को एक नंबर भी मिलता है, तो उसका परीक्षा परिणाम बदल जाएगा। ऐसे में एक नंबर से फेल होने वाले छात्र भी पास हो सकेंगे। यह नई व्यवस्था विवि एक्ट में बदलाव के बाद अगले महीने से शुरू हो जाएगी।
आरजीपीवी ने परीक्षा परिणाम में पारदर्शिता लाने के लिए वर्ष 2012 में चैलेंज की व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत छात्र अगर परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट रहता है तो वह चैलेंज के लिए आवेदन कर सकता है। आवेदन करने वाले छात्र की उत्तर पुस्तिका उसी के सामने संबंधित विषय के शिक्षकों की तीन सदस्यीय कमेटी द्वारा चेक करवाई जाती है। जांच के दौरान 10 फीसदी अंक बढ़ने पर ही उसके परिणाम में बदलाव होता है। इसी व्यवस्था को बदला जा रहा है। इसका फायदा विवि के पांच लाख से अधिक छात्रों को होगा और चैलेंज में छात्रों के पास होने का प्रतिशत भी बढ़ जाएगा।
ऐसे होता था छात्रों को नुकसान
चैलेंज में दस फीसदी अंक की बाध्यता के चलते कम से कम 7 नंबर बढ़ने पर ही परीक्षा परिणाम बदलता था। इससे अगर कोई छात्र 1 नंबर कम होने से फेल रहता और चैलेंज में उसके 6 नंबर भी बढ़ते थे, तब भी वह पास नहीं होता था। दरअसल, आरजीपीवी का थ्योरी एग्जाम 70 नंबर का रहता है। ऐसे में चैलेंज करने वाले छात्र को 70 नंबर का दस फीसदी यानी 7 नंबर बढ़ने पर ही फायदा मिलता है।
ईसी की मंजूरी के बाद बदलेंगे व्यवस्था
छात्रों के फायदे के लिए यह बदलाव किया जा रहा है। इसके लिए अकादमिक कमेटी और कार्य परिषद की मंजूरी जरूरी है। यह प्रक्रिया 15 दिन में पूरी हो जाएगी। इसके बाद चैलेंज के लिए नई व्यवस्था बन जाएगी।
डॉ. मोहन सेन, एग्जाम कंट्रोलर, आरजीपीवी
