भोपाल। प्रदेश के दो लाख अध्यापकों को मानदेय मद में राशि खत्म होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्हें मार्च माह का वेतन अब तक नहीं मिला है। इतना ही नहीं, गणना पत्रक जारी न होने के कारण मई में छठवां वेतनमान मिलने की उम्मीद भी खत्म हो गई है। कैबिनेट ने अध्यापकों को अप्रैल के वेतन से छठवां वेतनमान देने का निर्णय लिया है।
अध्यापकों को मानदेय हेड से वेतन दिया जाता है। इस हेड में राशि कम या खत्म होने पर दूसरे हेड से भुगतान होता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। पहले तो वार्षिक लेखाबंदी के कारण वेतन भुगतान में देरी हुई और अब मानदेय हेड में राशि खत्म हो गई है। जिस कारण प्रदेश के 3 लाख में से करीब 2 लाख अध्यापकों का मार्च माह का वेतन अटक गया है।
शासन ने दूसरे हेड से वेतन देना शुरू भी किया है, लेकिन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों (डीडीओ) ने वेतन बिल पर दूसरे हेड के बजाय पुराना हेड ही चढ़ाकर भेज दिया, जिसके चलते उनके बिल कोषालय में जाकर कैंसिल हो गया। अशोकनगर, खंडवा, बड़वानी सहित एक दर्जन जिलों में जिला शिक्षा अधिकारियों ने ग्रामीण क्षेत्र के अध्यापकों से अंतरिम राहत की चौथी किश्त की वसूली शुरू कर दी है।
