भोपाल। शिवाजी नगर और तुलसी नगर को स्मार्ट सिटी बनाने का विरोध और तेज हो गया है। रविवार को राजनीतिक दल से लेकर विशेषज्ञ और अन्य सभी लोगों ने एक मंच पर आकर सरकार की नीयत पर सवाल उठाए। सरकार से लोगों के जायज सवालों के जवाब न मिलने की पीड़ा सबके मन में थी। पर्यावरणविदों ने पूरी योजना को राजधानी की सेहत के लिए चिंताजनक बताया।
पांच नंबर स्टॉप पर आयोजित जन संवाद में पयावरणविद् सुभाष सी पांडे ने कहा कि मौजूदा हरियाली को उजाड़ने से पूरे शहर का ईको सिस्टम गड़बड़ा जाएगा। भले ही इसके एवज में दूसरी जगह पेड़ लगा दिए जाए, लेकिन वे यहां आसपास की ऑक्सीजन की कमी को पूरा नहीं कर पाएंगे। इसका सबसे बुरा असर 6 साल से 65 साल तक की उम्र के लोगों पर पड़ेगा। इस आयुवर्ग में दमा की बीमारी 30 फीसदी तक बढ़ेगी। कर्मचारी नेता अरूण द्विवेदी और ओपी शर्मा ने बताया योजना से के खिलाफ कर्मचारी संगठन जल्द ही संयुक्त बैठक करेंगे और प्रदेशव्यापी आंदोलन करेंगे।
खतरा: हरियाली के उजड़ने से पूरे शहर पर पड़ेगा असर
पांडे के मुताबिक गोविन्दपुरा औद्योगिक क्षेत्र से आने वाली जहरीली हवा को मौजूदा हरियाली शुद्ध करके पुराने शहर में भेजती है। पेड़ कटने से तापमान भी बढ़ेगा और हवा भी दूषित होगी।
चूक...
स्मार्ट सिटी के चयन से पहले ही पता करना था कितने पेड़ हैंं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और बायोडायवर्सिटी बोर्ड सफेद हाथी बन गए हैं। दोनों को बताना चाहिए था कि 5 हजार पेड़ कटने पर ऑक्सिजन की क्या स्थिति होगी। इसके बाद ही स्मार्ट सिटी का प्लान बनना था।
फिक्र...
सरकारी क्वार्टर तोड़ने के लिए उन्हें कहां शिफ्ट किया जाएगा।
क्षेत्र से कितने पेड़ काटे जाएंगे
शिफ्टिंग की प्रक्रिया कब से शुरु होगी
नोटिस दिए बिना ही शिफ्टिंग तो शुरु नहीं हो जाएगी
प्रायवेट मकानों को तोड़ा जाएगा या नहीं
जो पेड़ कटेंगे उनके स्थान पेड़ कहां और कितने लगेंगे।
शंका: फर्जीवाड़े पर आंच तक नहीं
स्मार्ट सिटी में फर्जी तरीके से सुझाव देने वालों निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई? केंद्र सरकार को गलत जानकारी देने वाले अफसरों के खिलाफ जांच तक नहीं की। लोगों के सुझाव लिए बिना क्षेत्र का चयन कैसे हो गया?
सरकार की नीयत पर खोट
कार्यक्रम में भाकपा नेता शैलेंद्र शैली ने कहा कि स्मार्ट सिटी योजना औद्योगिक घरानों और पूजीपतियों को सौंपने के षड़यंत्र के तहत बनी है। इसमें एक भी जनप्रतिनधि शामिल नहीं है जो योजना का विरोध कर सके। इसके खिलाफ लोगों को सड़क से संसद तक विरोध करना पड़ेगा।
समाधान...लोगों के दिल से
शिवाजी नगर और तलसी नगर के स्थान पर भेल की खाली जमीन, उजाड़ पड़े नार्थ टीटी नगर या कहीं और योजना क्यों नहीं बनाई जा सकती है। रेट्रोफिटिंग और ग्रीन फील्ड मॉडल का चयन भी किया जा सकता है।
