नीरज साकल्ले/भोपाल। भारतीय जीवन बीमा निगम की शाखा नंबर 4 में हुई 2.40 करोड़ रुपए की हेराफेरी के मामले को निगम ने वहीं दफन कर दिया है। न तो NEFT के जरिए MONEY TRANSFER करने वाले का पता चला और न ही उन व्यावसयियों के ACCOUNT और PAN NUMBER ऑफिस तक कैसे पहुंचे, इस पर से पर्दा उठा। इस पूरे मामले में लिप्त कर्मचारियों को निलंबित करने के बजाय उनके पसंदीदा स्थान पर ट्रांसफर करके अफसरों ने यह जरूर प्रमाणित कर दिया कि खेल में बड़े खिलाड़ी भी शामिल हैं। इससे पहले आरोपी कर्मचारियों को निलंबित करने का फरमान जारी किया था।
निगम अधिकारियों के अनुसार यह मामला सिर्फ गलत NEFT का नहीं है, बल्कि जानबूझकर FRAUD PAYMENT VOUCHER तैयार किए गए और किसी अपने के खाते में इतनी बड़ी रकम जमा की गई। आरोपियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने को कहा गया था।
पता चला है कि उन्हें निलंबित करने के बजाय उनकी मनचाही जगह ट्रांसफर कर दिया गया। एक को भेल स्थित निगम की शाखा में, दूसरे को पुराने भोपाल की शाखा-1 में घर के पास पदस्थ कर दिया गया, वहीं तीसरे को न्यू मार्केट स्थित शाखा भेजा गया है।
अफसरों की भूमिका संदिग्ध
पता चला है कि इस मामले में LIC के दो अन्य कर्मचारी प्रद्युम्न सिंह भदौरिया और अाशीष श्रीवास्तव की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है लेकिन इनके खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। TRANSACTION के लिए जिन कर्मचारियों के COMPUTER और IP का इस्तेमाल किया गया, उनमें महेश मालवीय का नाम भी सामने आया है। जबकि महेश घटना वाले दिन छुट्टी पर था। अाशीष श्रीवास्तव और प्रद्युम्न सिंह भदौरिया कभी-कभी उसके कम्प्यूटर पर कार्य करते थे।
अब्बासी के अनुसार जिस दिन (11 मार्च 2016) यह गड़बड़ी हुई, उस दिन उनके कम्प्यूटर का पासवर्ड ब्लाॅक होने की शिकायत उन्होंने अधिकारियों से की थी। यह परेशानी दो बार सामने आई थी। इस घोटाले में प्रद्युम्न सिंह भदौरिया के शामिल होने की आशंका भी जताई गई है। क्योंकि प्रद्युम्न सिंह का काम शाखा में NEFT भुगतान की जांच करना नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने दो बार इस ट्रांजेक्शन की जांच की और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद आॅफिस से रवाना हुए। साथ ही अपनी उपस्थिति सीहोर के रेस्टॉरेंट में बताई।
- श्री नीरज साकल्ले इन दिनों डीबी स्टार को सेवाएं दे रहे हैं।
