राकेश दुबे@प्रतिदिन। भोपाल में बनने जा रही स्मार्ट सिटी का आन्दोलन, उबलना शुरू हुआ है | सर्व ज्ञात तथ्य है कि उबलने की प्रक्रिया हमेशा वही से शुरू होती है, जहाँ आंच ज्यादा लगती है | स्मार्ट सिटी का केंद्र शिवाजी नगर और उसका केंद्र कल्याणी होस्टल और 101 की चर्चित मकान पंक्ति है | हाँ| इसकी जद में भोपाल विकास प्राधिकरण के कुछ मकान भी आते दिखाई देते हैं और उन मकान मालिकों [सरकारी भाषा में लीज धारक ] को अपने ये घर उजड़ते दिखाई दे रहे हैं |
बात आन्दोलन के केंद्र और अगुआई की है | स्मार्ट सिटी के केंद्र में शिवाजी नगर और शिवाजी नगर का केंद्र में 101 की लाईन जिसमे कल्याणी होस्टल भी है, आन्दोलन का केंद्र है | प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव श्रीमती निर्मला बुच के नेतृत्व में इस स्मार्ट सिटी की लिखापढ़ी चल रही है,वे वर्षो से चल रहे कल्याणी होस्टल की संचालक संस्था महिला चेतना मंच की अध्यक्ष भी है | 101 की चर्चित लाइन में शायद ही कोई ऐसा है जिसका अपना घर किसी और जगह नहीं बना है | पर सबके अपने सरोकार हैं,शिवाजी नगर से| सरस्वती शिशु मन्दिर भी है, जिसके संचालको की दृष्टि में स्मार्ट सिटी एक कल्याणकारी कदम है | तो मन्दिर के साथ जुडी दुकानों के अपने तर्क हैं, तो ब्रदरन एसेम्बली भी है | फेहरिस्त बहुत लम्बी है | मुद्दे पर आते हैं |
सवाल यह है की स्मार्ट सिटी बनना चाहिए या नहीं और कहाँ बनाना चहिये ? मध्यप्रदेश सरकार इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाये बगैर एक बार सोचे कि मकान आपका है, आप मकान मालिक हैं, पर [कुछ लोगों को छोडकर] घर तो उसका है, जिसने वहां पिछले 30 सालों में वे पेड़ लगाये जिससे चार इमली आक्सीजन ले रही है | यह तर्क बहुत बेमानी है की हम पेड़ लगा देंगे | सामाजिक वानिकी और अन्य कई योजना के नाम से तुलसी नगर और शिवाजी नगर में पिछले 30 साल में कई बार पौधे लगाये गये पर वे ही पेड़ बड़े हुए जो किसी के घर में थे | आपके मकान को जिसने घर बनाया उसकी सुनिए आपका कारकून है, इसका मतलब.......!
यह योजना प्रधानमंत्री जी ने बनाई, भोपाल को शामिल किया, पर स्मार्ट सिटी भोपाल में कहाँ बने, इसका इल्म तो राज्य सरकार और भोपाल नगर निगम ने ही दिया है | सरकार या सिटी सरकार ने कभी यह नहीं सोचा कि स्मार्ट सिटी को कोलार, बैरागढ़, बैरसिया रोड या होशंगाबाद की तरफ बनाये जहाँ मकान से ज्यादा नागरिक सुविधा की जरूरतें है | वल्लभ भवन भी अपने उस अधिकारी स्व. एम् एन बुच को भूल गया जिन्होंने अगले ७५ साल की योजना के अनुरूप नये भोपाल के ब्लू प्रिंट में योगदान दिया था | तीन हठो में राज हठ भी शामिल है, यह हठ कहीं “सब कुछ लुटा के ......|”
भोपाल मेरा भी है और सरोकार भी है, स्मार्ट सिटी के नाम पर, इस क्षेत्र से य यहाँ वहाँ जाने वालों से | भोपाल के विकास के लिए स्मार्ट सिटी बनना चाहिए पर नये रायपुर की भांति, खाली सरकारी जगह पर | अपने मकान और किसी के घर का ख्याल रखिये और स्मार्ट सिटी में इतने सस्ते घर बनाये कि शिवाजी नगर की 101 लाइन के चपरासी क्वार्टर में रहने वाले को भी छत आसानी से नसीब हो सके |
श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
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