छत्तीसगढ़ में न्याय में रिकार्ड देरी का एक नया मामला सामने आया है। दूध में पानी मिलाने के एक मामले में 43 साल बाद फैसला सुनाया गया। इस दौरान पेशी पर अनुपस्थित रहने के कारण आरोपी को 7 माह जेल भी भेजा गया, जबकि इस मामले में अधिकतम सजा 6 माह है। न्यायालय ने उसपर जुर्माना लगाकर मुक्त कर दिया है, परंतु लॉजिकल देखा जाए तो उसे 43 साल तक पेशी पर आते रहने के लिए मुआवजा मिलना चाहिए।जब प्रकरण दर्ज हुआ तब आरोपी 6वीं का छात्र था। आज जब फैसला आया तो उसका पोता 6वीं में पढ़ रहा है।
बता दें कि छठी कक्षा में पढ़ाई के दौरान दर्ज हुए इस मामले में न्यायालय का चक्कर काटते हुए वृद्ध को 43 साल बाद मुक्ति मिल गई है। सूरजपुर के प्रतापपुर के गांव का रहने वाला रामदास आज जिसकी उम्र 54 साल हो गई है। इस आदमी का गुनाह बस इतना है कि जब वह कक्षा छह में पढ़ाई कर रहा था तब वह अपने गांव से दूध लेकर पास के होटल में देने जाता था।
रामदास बताते हैं कि उन्हें आज भी वह दिन याद है जब होटल में दूध देते हुए खादय अधिकारी ने उसे पकड़ा था, जिसकी वजह से वह 43 साल से न्यायालय में पेशी के लिए आ रहा है। इस दौरान एक बार पेशी पर समय से नहीं पहुंचने के लिए उसे सात महीने से ज्यादा तक जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। आपको बता दें कि जिस प्रकरण में रामदास को 43 साल इंतजार करना पड़ा, उसकी सजा छह महीने है।
ये पूरा मामला 1972 का है। रामदास जिस भैंस का दूध बेचने आता था, वह तो कब की गुजर चुकी है। मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ भी बन गया। समय बदला, हालात बदले, लेकिन दूध में मिलावट का प्रकरण आज तक आदालत में चलता आ रहा था। रामदास जो प्रतापपुर ब्लॉक के टुकुडाड का रहने वाला है, किसी तरह मजदूरी मेहनत कर अपने परिवार का पेट भरता है। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उसे 43 सालों तक अदालत के चक्कर लगाने पड़ेंगे।
रामदास बालक से जवान और अब बूढ़ा हो गया है। चेहरे पर झुर्रियां आ गईं। सिर के बाल सफेद हो गए, लेकिन दूध में मिलावट का केस अब 43 साल बाद जाकर खत्म हुआ है।
कानून की जानकारी ना होने के कारण रामदास सात माह की जेल तक काट चुका है, जबकि इस मामले में सजा ही मात्र छह महीने की है। रामदास के अधिवक्ता ने बताया कि कानून सबके लिए एक समान है और खाद्य पदार्थों में मिलावट एक गंभीर मामला है।
