उपरोक्त विषयांतर्गत अवगत कराया जाता है कि प्रदेश में तकनीकि शिक्षा एंव कौशल विकास विभाग द्वारा सन 2012 से विकासखण्ड स्तर पर 135 कौशल विकास केन्द्र संचालित किये जा रहे है जिसमे बेरोजगार युवक युवतियों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया जा रहा है जिससे उनके जीवन यापन के लिए एक हुनर दिया जा सके।
केन्द्रो के संचालन के लिए मैनेजर, लेखापाल, एवं प्रशिक्षण प्रदान कराने के लिए प्रशिक्षक पद की संविदा आधार पर भर्ति की गई। जिनकी भर्ति शासन के द्वारा निर्धारित चयन प्रक्रिया, शैक्षेणिक योग्यता एवं एमपीआॅनलाईन के माध्यम से की गई।
कर्मचारियों का वेतनमान विभाग द्वारा निर्धारित किया गया। जिसमें प्रशिक्षक पद को 7200 रु प्रतिमाह मानदेय सुनिष्चित किया गया। प्रशिक्षक पद की भर्ति के लिए षैक्षेणिक योग्यता इंजीनियरिंग बीई.डिग्री/डिप्लोमा रखी गई। प्रशिक्षक कौशल विकास केन्द्र का आधार स्तम्भ है। वहीं समानकार्य करते हुए आईटीआई में कार्यरत प्रशिक्षण अधिकारियों का वेतन लगभग 30000 से 35000 है, और मेहमान प्रवक्ता को 5 घंटे के 10000 रु दिये जा रहे है। यह विभाग की दोहरी नीति क्यों ?
इंजीनियरिंग डिग्री करने के बाद वेतन अकुशल मजदूर से भी कम दिया जा रहा है जबकि केन्द्र मे ही कार्यरत सिक्युरिटी गार्ड का वेतन लगभग 9000 से 10000 रु प्रतिमाह दिया जा रहा है जिनकी योग्यता 5वीं पास है।
प्रशिक्षकों को वेतन श्रम विभाग के नियमानुसार उच्च कुशल मानदेय भी नही दिया जा रहा जो कि असंवैधानिक है। 4 साल मे किसी भी कर्मचारी की कोई वेतनव्रद्धि नही की गई जबकि अन्य विभागों मे कार्यरत संविदाकर्मीयों को प्रतिवर्ष 10 से 15 प्रतिशत वेतनव्रद्धि की जा रही है।
संपादक महोदय के द्वारा कौशल विकास केन्द्र के समस्त कर्मचारी प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहते है कि देश एवं प्रदेश में प्रधानमंत्री महोदय द्वारा स्किल इंडिया प्रोग्राम के तहत कौशल विकास योजना सफलतापूर्वक चलायी जा रही है। जिस पर करोडो रुपये प्रतिवर्ष खर्च किये जा रहे है। लैकिन दूसरों का कौशल विकास करने वाले अपना ही जीवन यापन नही कर पा रहे है।
माननीय मुख्यमंत्री जी इस दुर्दशा को अपने संज्ञान मे लेते हुए समस्या का निराकरण करने का कष्ट करें।
राजेश कुमार साहू
प्रदेश अध्यक्ष
मो.9806865707
संविदा कौशल विकास प्रशिक्षक संघ
