बैतूल। उमरडोह गांव के सैकड़ों आदिवासी बीते सात दिनों से जिला मुख्यालय पर ढोल-ताशाें के साथ धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका आरोप है कि प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर उनके मवेशियों को मार डाला.
बीते 19 दिसंबर को वन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने उमरडोह गांव में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया था. आदिवासियों का आरोप है कि प्रशासनिक अमले ने उनकी करीब 45 झोपड़ियां तोड़कर मवेशियों को मार डाला और आसपास के जल में जहर मिला दिया था. इस अन्याय के खिलाफ सैकड़ों आदिवासी बैतूल कलेक्ट्रेट के सामने सात दिनों से धरना देकर न्याय मांग रहे हैं.
कलेक्टर ज्ञानेश्वर बी पाटिल ने प्रदर्शनकारियों से मिलकर बात नहीं की, इसलिए सभी वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक एचयू खान के दफ्तर पहुंच गए. काफी देर सीसीएफ कार्यालय के सामने आदिवासी ढ़ोल ताशाें के साथ प्रदर्शन करते रहे. वन विभाग ने पहले बैतूल पुलिस को मौके पर बुलाया और इसके बाद कहीं जाकर आला अधिकारियों ने आदिवासियों का सामना किया.
बैतूल सीसीएफ एच.यू.खान ने आदिवासियों को पूरे मामले की जांच करने का आश्वासन तो दिया, लेकिन आदिवासियों के वहां से हटते ही उनके सुर दोबारा बदल गए और वो वन विभाग की कार्यवाही के समर्थन में वकालत करने लगे. सीसीएफ एचयू खान का कहना है कि ये आदिवासी रिजर्व फॉरेस्ट में अतिक्रमण करके रह रहे थे, इसलिये इन्हें नियम के अनुसार हटाया गया है.
