भोपाल। पांचवीं और आठवीं की परीक्षा इस बार बोर्ड पैटर्न पर ही होगी। केंद्र सरकार अब तक आरटीई की धारा 30 को खत्म करने का निर्णय नहीं ले सकी है। हालांकि सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ एजुकेशन (कैब) की उपसमिति ने दोनों परीक्षाओं को बोर्ड करने की अनुशंसा कर दी है। अब यह प्रस्ताव कैबिनेट में जाएगा। संभव है कि अगले सत्र से दोनों परीक्षाएं बोर्ड घोषित कर दी जाएं। स्कूल शिक्षामंत्री पारस जैन और राज्यमंत्री दीपक जोशी की मुहिम सफल हो रही है। दिल्ली में बुधवार को कैब की उपसमिति की बैठक हुई है।
जिसमें 5वीं-8वीं परीक्षा को बोर्ड करने का निर्णय हुआ है। राजस्थान के शिक्षामंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्राइमरी शिक्षा का स्तर सुधारने दोनों परीक्षाओं को पहले की तरह बोर्ड करना जरूरी माना गया। उपसमिति के सदस्यों ने सरकार को शिक्षकों की जिम्मेदारी और छात्रों का लर्निंग लेवल तय करने की भी सलाह दी है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के शैक्षणिक स्तर में गिरावट को देखते हुए दोनों मंत्रियों ने कैब में आरटीई की धारा 30 खत्म करने का मुद्दा उठाया था।
उपसमिति ने कहा है कि 5वीं और 8वीं में बोर्ड परीक्षा अनिवार्य है। इस परीक्षा को कड़ाई से लिया जाना चाहिए। ताकि प्रारंभिक स्तर पर ही बच्चे का परफार्मेंस देखा जा सके और उन्हें भविष्य की तैयारी करने का अच्छा अवसर दिया जा सके। उपसमिति ने तय किया है कि कोई छात्र 5वीं-8वीं की बोर्ड परीक्षा में फेल होता है, तो एक माह में उसे परीक्षा का दूसरा अवसर दिया जाएगा।
यह पूरक परीक्षा होगी और इसे उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। यदि पूरक में भी छात्र फेल होता है, तो उसे दूसरे साल भी उसी कक्षा में पढ़ना होगा। उपसमिति की अनुशंसा केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजी जाएंगी। मंत्रालय प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेजेगा और केबिनेट आरटीई की धारा 30 खत्म करने का निर्णय लेगी। ज्ञात हो कि यह धारा पहली से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं को परीक्षा से मुक्त करती है।
परीक्षा की तैयारी शुरू
राज्य शिक्षा केंद्र ने पिछले साल की तरह ही बोर्ड पैटर्न पर 5वीं-8वीं की परीक्षा कराने की तैयारी शुरू कर दी है। उम्मीद है कि दोनों परीक्षाएं अप्रैल में शुरू होंगी। स्कूल शिक्षा विभाग बोर्ड पैटर्न पर परीक्षा कराने के लिए राज्य स्तर पर प्रश्न पत्र तैयार कराएगा। ये प्रश्न पत्र जिलों में भेजे जाएंगे। दूसरे स्कूलों के शिक्षक बतौर पर्यवेक्षक परीक्षा कराएंगे और संकुल स्तर पर मूल्यांकन कराया जाएगा। पिछले शैक्षणिक सत्र में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई थी।
कब लिया गया निर्णय
आरटीई एक्ट एक अप्रैल, 2010 से देशभर में लागू हुआ है। इसके तहत पहली से आठवीं कक्षाओं की परीक्षा नहीं कराई जा सकती है। इन कक्षाओं में सिर्फ मूल्यांकन कराने की अनुमति है। उधर, मप्र ने आरटीई लागू होने से पहले ही 5वीं और 8वीं को बोर्ड परीक्षा से मुक्त कर दिया था। वर्ष 2008 में तत्कालीन स्कूल शिक्षामंत्री स्व. लक्ष्मण सिंह गौड़ के अनुशंसा से राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया था।
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कैब की उपसमिति की बैठक में 5वीं-8वीं परीक्षा बोर्ड करने का निर्णय हो गया है। उपसमिति मंत्रालय को अनुशंसा भेज रही है। संभवत: अगले शैक्षणिक सत्र में दोनों को बोर्ड परीक्षा घोषित कर दिया जाएगा। वर्तमान परीक्षा बोर्ड पैटर्न पर कराई जाएगी। तैयारी शुरू कर दी है।
पारसचंद्र जैन, मंत्री, स्कूल शिक्षा विभाग
