नईदिल्ली। मद्रास हाईकोर्ट के जज जस्टिस एस वैद्यनाथन ने एक एतिहासिक सुनवाई की एवं तुरंत न्याय उपलब्ध कराया। देश की न्याय व्यवस्था में यह पहली बार हुआ कि Skype के जरिए दलीलों की सुनवाई हुई और ईमेल पर फैसले की कॉपी भेजी गई। मामला एक शादी में चर्च के अधिकारियों द्वारा डाली जा रही रुकावट का था, कोर्ट ने पुलिस की सुरक्षा में विवाह सम्पन्न कराने के आदेश दिए।
यह केस तमिलनाडु के रामनाथपुरम का है, जहां एक चर्च में शादी के लिए सुरक्षा संबंधी याचिका बिल्कुल अंतिम समय पर दाखिल की गई। याचिका दाखिल करने वाले एम जेशु ने दावा किया कि पुलिस की गड़बड़ी की वजह से उन्हें अदालत का सहारा लेना पड़ा, लेकिन समय कम था, इसलिए उन्होंने जज साहब को सभी डॉक्यूमेंट स्कैन करके ई-मेल पर भेज दिए। जस्टिस वैद्यनाथन ने केस की सुनवाई की और शनिवार रात 8 बजे पुलिस को शादी समारोह की सुरक्षा का आदेश जारी कर दिया।
दिवाली की वजह से अधिकतर जज छुट्टी पर थे और जब यह याचिका आई तो मामला जस्टिस वैद्यनाथन के पास पहुंचा। उन्होंने समय रहते कार्यवाही करके देश के सामने नई मिसाल पेश की है। बताया जा रहा है कि याचिकाकर्ता और चर्च के प्रतिनिधियों के बीच किसी बात पर विवाद था, जिसकी वजह से शादी में परेशानी आ रही थी। याचिकाकर्ता के मुताबिक, पुलिस भी चर्च के अधिकारियों का ही साथ दे रही थी। जस्टिस वैद्यनाथन ने हाईकोर्ट की बेंच के एडमिनिस्ट्रेटिव जज वी रामासुब्रमण्यम की सलाह पर इस केस की सुनवाई वीडियो चैट साइट Skype के जरिये की।

