भोपाल। आदिवासियों में बैगा जनजाति लुप्तप्राय होती जा रही है। सरकार इस जनजाति के संरक्षण के लिए पैसा पानी की तरह बहा रही है परंतु अधिकारी सरकारी मदद आदिवासियों तक पहुंचने ही नहीं दे रहे। एक मामले में तो इंदिरा आवास के लिए आए 24 हजार रुपए में से आदिवासी को केवल 1000 रुपए ही मिले, 23 हजार रुपए अधिकारी ने रख लिए।
मामला मानवाधिकार आयोग में पहुंचा तब भी अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। अब मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव को सीधे तलब किया है।
मंडला जिले के जैलपारा गांव के बैगा आदिवासी अमर मरावी के नाम पर मंजूर हुए इंदिरा आवास योजना के 24 हजार में से 23 हजार स्र्पए स्थानीय अधिकारी खा गए। इस मामले में कहीं सुनवाई न होने पर बैगा आदिवासी मरावी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायत कर पूरी स्थिति बताई थी। आयोग ने इस मामले में राज्य सरकार से भी कई बार जानकारी मांगी, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं जा पाया। इसके चलते मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव अंटोनी डिसा को इस मामले में 16 नवंबर को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए दिल्ली तलब किया है।
इसमें कहा गया है कि बैगा आदिवासियों के लिए केन्द्रीय योजनाओं में मिलने वाला पैसा स्थानीय अधिकारी हड़प रहे हैं, लेकिन सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही। इसके अलावा भी मंडला में आदिवासियों के साथ शोषण की कई शिकायतें दिल्ली पहुंची है। इसी के चलते हाल ही में मानवाधिकार आयोग के संपर्ककर्ता अधिकारी पीपी माथुर मंडला के पांच दिवसीय दौरे पर आए थे। उन्होंने मंडला में दौरा कर आदिवासियों के लिए चलाई जा रही केंद्र की योजनाओं की रिपोर्ट तैयार की है। माथुर ने इस मामले में मुख्य सचिव को भी मैदानी हकीकत बताकर आदिवासियों के शोषण पर चिंता जाहिर की है।

