भोपाल। रतलाम-झाबुआ संसदीय उपचुनाव में भाजपा की पतली हालत के चलते अब आरएसएस ने मोर्चा संभाल लिया है। आरएसएस के स्वयंसेवक गांव गांव पहुंच गए हैं और जनसंपर्क कर रहे हैं। आदिवासी क्षेत्र में विभिन्न् प्रकल्पों में लगे पदाधिकारियों को भी चुनावी ड्यूटी सौंपी गई है।
लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली आठों विधानसभा क्षेत्र में मैदानी स्तर पर शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में संचालित संघ के प्रकल्प से जुड़े स्वयंसेवकों को मतदान केंद्रों की जवाबदारी सौंपी गई है। खासतौर पर आदिवासी अंचलों में कार्यकर्ताओं को भेजा जा रहा है। क्षेत्र में नए सिरे से कार्यकर्ताओं की जमावट की गई है। प्रचार की नए सिरे से रणनीति बनाई गई है।
शनिवार से मुख्यमंत्री की चुनावी सभाएं शुरू हो गईं हैं, सीएम की जनसभाओं का सिलसिला 19 नवंबर तक चलेगा। संघ से जुड़े कार्यकर्ता एवं बीजेपी के पूर्व संगठन मंत्रियों को भी गांव-गांव में भेजा गया है। बीजेपी ने मंडल, जिला एवं विधानसभा स्तर पर अपने विधायकों, पार्टी पदाधिकारी एवं मंत्रियों की तैनाती पहले ही सुनिश्चित कर ली है। इस आदिवासी अंचल में कार्यरत संघ के अनुषांगिक संगठनों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया गया है। बीजेपी ने क्षेत्र में चुनावी सर्वेक्षण कराकर अपनी तैयारियों की समीक्षा की है। इसके आधार पर पार्टी अपनी मैदानी जमावट कर पूरी ताकत झोंक दी। हालात यह बने हुए हैं कि दीपावली के अवसर पर भी चुनाव प्रचार जारी रहा। बाहर से आए स्वयंसेवकों को दीपावली पूजा के लिए भी नहीं जाने दिया गया।

