उपदेश अवस्थी@लावारिस शहर। गरीब बच्चे को लात वाले मामले में जैसे जैसे दिन बीतते जा रहे हैं, विषय को उलझाने के उपक्रम भी बढ़ते जा रहे हैं। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है, लात मारी गई। ना तो धोखे से लगी और ना ही वो आकर पैरों में लिपटा। चाहे तो दो चार बार फिर से वीडियो देख लो।
मामला उजागर होते ही मंत्रीजी चुप हो गईं। पूरी भाजपा में सन्नाटा पसर गया। किसी की मां बीमार हो गईं तो कोई मीटिंग में व्यस्त हो गया। दुनिया भर के मामलों में टांग अड़ाने वाले भाजपा नेता भी टीवी चैनलों के डिस्कशन पैनल में आने से बचते रहे।
दूसरे दिन मंत्रीजी ने एक लिखित प्रेसनोट जारी किया। कहा वो 20 साल का है। उसने शराब पी रखी थी। मैं सिर्फ इतना पूछना चाहता हूं कि
- क्या आपके पास उसका बर्थ सर्टिफिकेट है, जो उम्र घोषित कर दी।
- यदि 20 साल का भी है तो क्या लात मार दी जानी चाहिए।
- क्या मप्र में मंत्रियों को शराबियों को लात मारने का लाइसेंस मिला है।
- एक शराबी मंत्री के इतने पास आ गया, सुरक्षाकर्मियों को पता तक नहीं चला।
- जब मेडिकल ही नहीं हुआ तो शराबी कैसे कह दिया।
कुल मिलाकर मंत्री के प्रेसनोट का मीडिया ने जमकर पोस्टमार्टम किया। मंत्रीजी का पांसा फेल हो गया था। भाजपाई हैं, क्षमा तो मांग ही नहीं सकते। ढीकरा फोड़ने के लिए किसी ना किसी सर की तलाश थी। वैसे भी पिछले कुछ दिनों से मंत्रीजी मीडिया से खुन्नाई हुईं थीं।
आजतक के स्ट्रिंगर का स्टिंग हो गया। वो बच्चे को शराब का लालच दे रहा था। हालांकि वो कोई झूठा आरोप नहीं लगवा रहा था, बस अपनी खबर में कुछ नया जोड़ने का प्रयास कर रहा था, परंतु लालच देकर मनमाना बयान रिकार्ड करना गलत बात है। वीडियो वायरल हुआ तो मंत्रीजी के समर्थकों को मौका मिल गया। सारा ढीकरा टीवी चैनल वाले पर फोड़ दिया गया। यहां वहां दुबके भाजपाई बाहर आ गए। मीडिया को पानी पी पीकर कोसने लगे।
- मामले को मूल विषय से ही भटका दिया गया। विषय है 'मंत्री ने लात मारी'।
- मुद्दा है मप्र में गरीबों के प्रति मंत्रियों का व्यवहार।
- मुद्दा है मप्र सरकार और उसके मंत्रियों की संवेदनशीलता।
- मुद्दा है मप्र सरकार के मंत्रियों का सामंती व्यवहार।
लेकिन पूंछ पकड़कर हाथी डुबाने की कला कुछ लोगों को अच्छे से आती है। यहां भी वही प्रयास हो रहे हैं। स्ट्रिंगर को ऐसे टारगेट किया जा रहा है मानो उसने सारा षडयंत्र रचा था। चलिए, आजतक ने अपने स्ट्रिंगर को हटा दिया है। अब बॉल फिर मंत्रीजी के पाले में है। यदि अपने किए पर शर्मिंदा हों, तो इस्तीफा दे दो। नहीं तो ऐलान कर दो, हमारी सरकार है, हम ऐसा ही करेंगे। क्या कर लोगे। सारा बवाल ही थम जाएगा।

