शेयर जैसे हर रोज घटेंगे बढ़ेंगे बिजली के दाम

Updesh Awasthee
नईदिल्ली। घरेलू और औद्योगिक, दोनों तरह के उपभोक्ताओं के लिए बिजली किसी भी दूसरी कमोडिटी की तरह होने वाली है। यानी डिमांड बढ़ने पर महंगी और घटने पर सस्ती। राज्यों के बिजली नियामक आयोग टैरिफ में इस आधार पर बदलाव करने को राजी हो गए हैं।

कन्जयूमर्स को उनके मोबाइल पर या बिजली विभाग की ओर से दिए गए किसी अन्य डिवाइस पर करीब आधा घंटा पहले कीमत बढ़ने की जानकारी दे दी जाएगी। यह भी बताया जाएगा कि ऐसी स्थिति कब तक रहेगी। इसे देखते हुए उपभोक्ताओं को बिजली के उपकरणों के इस्तेमाल में सहूलियत होगी। वहीं दाम चढ़ने के दौरान यूटिलिटिज के सामने कम डिमांड आएगी और पावर एक्सचेंजों से महंगी बिजली खरीदने की उनकी जरूरत घटेगी।

इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम के प्रेजिडेंट रेजी कुमार पिल्लई ने कहा, 'यह सब केंद्र सरकार के नैशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन का हिस्सा है। इसे पायलट बेसिस पर 14 राज्यों में लागू किया जा रहा है।' उन्होंने कहा, 'इन फेज-वन प्रॉजेक्ट्स की लागत 10 करोड़ से 70 करोड़ रुपये के बीच होगी। इनके तहत 10,000 से लेकर 80,000 तक कन्जयूमर्स को सर्विस दी जाएगी। प्रॉजेक्ट कॉस्ट का आधा हिस्सा केंद्र और बाकी हिस्सा राज्य देंगे।'

फेज टू में केंद्र ने राज्यों से कहा है कि वे दो-तीन स्मार्ट शहरों के नाम बताएं, जहां इन प्रॉजेक्ट्स को लागू किया जा सकता हो। इस संबंध में एक मीटिंग हाल में हुई थी।

उन्होंने कहा, 'यह सब बड़े पैमाने पर किया जाएगा और अंत में बड़े शहरों को इस स्कीम के दायरे में लाया जाएगा।' उन्होंने कहा कि इस फेज में 'प्रॉजेक्ट कॉस्ट का एक तिहाई हिस्सा केंद्र देगा। बाकी हिस्सा संबंधित राज्य देगा।'

स्मार्ट ग्रिड के जरिए उपभोग पर एक कंट्रोल रूम से नजर रखी जाती है। इससे यूटिलिटीज को डिमांड के आधार पर बिजली सप्लाई करने की सहूलियत मिलती है। अभी कंट्रोल रूम्स इस तरह की निगरानी नहीं कर पाते हैं।

पिल्लई ने कहा, 'इन प्रॉजेक्ट्स को लागू कर दिए जाने पर कंट्रोल रूम इस बात पर नजर रख सकेगा कि हर कन्जयूमर ने कितनी बिजली का उपभोग किया।' इस वक्त जब डिमांड बढ़ती है तो यूटिलिटीज को मजबूरन पावर एक्सचेंजों से महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। इसके चलते उनमें से कई को घाटा उठाना पड़ता है। पिल्लई ने कहा कि प्रस्तावित बदलावों से यूटिलिटीज को खरीदी गई बिजली की लागत के मुताबिक टैरिफ बढ़ाने का मौका मिलेगा।

पिल्लई ने कहा, 'ज्यादातर राज्यों के नियामक आयोगों ने ऐसे डायनमिक प्राइसिंग सिस्टम पर सहमति जताई है।'

डायनमिक प्राइसिंग सिस्टम से बिजली की डिमांड में कमी आने की उम्मीद की जा रही है क्योंकि कन्जयूमर्स पीक टाइम में महंगी बिजली लेने से बचेंगे। इससे कन्जयूमर्स बिजली यूं ही खर्च करने की आदत से भी परहेज करेंगे।

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