कमाल की खबर: पूरे देश में फैल लेकिन मप्र में टॉपर मैगी

Updesh Awasthee
उपदेश अवस्थी लावारिस शहर। अद्भुत, अदम्य, अतुलनीय, अद्वितीय, मप्र के शासनतंत्र और इंदौर की चौकसी लैब के बारे में तो जो भी कहा जाए कम है। जिस मैगी के नमूनों को पूरे देश के लेबों में फैल कर दिया गया, उस मैगी के नमूने इंदौर की चौकसी लैब में पास हो गए। विशेषज्ञों को मैगी में कोई हानिकारक तत्व नहीं मिला। वो तो भला हो नेस्ले इंडिया का जो उसने मैगी को बाजार से वापस लेने की घोषणा कर दी, नहीं तो मैगी पूरी दुनिया बैन हो जाती, लेकिन मप्र में धड़ल्ले से बिकती रहती। 

मैगी पर सवाल खड़े होने के बाद पहली बार देशभर की तमाम राज्य सरकारों ने मैगी की अपने अपने स्तर पर जांच कराई। स्वभाविक था, सरकारें प्रदेश की सबसे भरोसमंद और बेहतरीन लैबों पर ही जांच करा रहीं थीं। केरला से दिल्ली तक कोई एक दर्जन प्रदेशों की लैबों ने मैगी में लेड की मात्रा हानिकारक स्तर तक पाई, यहां तक कि सिंगापुर की लैब ने भी यही तत्व पाए लेकिन अपने मप्र की इंदौर स्थित चौकसी लैब के विशेषज्ञों को मैगी के नमूनों में लेड नहीं मिला है। 

कितनी अजीब बात है ना, जो मैगी पूरे देश में फैल हो गई वो मप्र में टॉपर है। क्या ये रिपोर्ट मप्र की इंदौर स्थित चौकसी लैब और उसके विशेषज्ञों की योग्यता पर सवाल खड़े नहीं करती। क्या ऐसी लैब को बंद नहीं कर दिया जाना चाहिए, जो जहरीली मैगी को स्वास्थ्यवर्धक बताती है। क्या ऐसे विशेषज्ञों को नौकरी से तत्काल बाहर नहीं निकाल देना चाहिए जो मैगी में लेड की मात्रा ही नहीं तलाश पाए। क्या इन विशेषज्ञों की योग्यता की जांच किसी अच्छी लैब में नहीं करा लेनी चाहिए, क्योंकि अब यह स्पष्ट कहा जा सकता है ​कि इस लैब के विशेषज्ञों के दिमाग में कुछ खतरनाक वायरस घुस गए हैं, कोई केमिकल लोचा है, जो सही और गलत की पहचान नहीं होने देता। 

मैगी के खिलाफ चीख चीख कर खबरें चलाने वाली मप्र की बिकाऊ मीडिया भी इस रिपोर्ट को पचा गई। सरकार की बदनामी बचा गई। कांग्रेस से क्या उम्मीद करें। पूरा एक दशक बीत गया। कांग्रेस केवल दो ही तरह के विरोध करती है, पहला वो जो मीडिया की सुर्खियां बन जाए और दूसरा प्रायोजित विरोध। जिसमें कांग्रेसियों को कोई फायदा होता हो। इसलिए उससे तो जनहित की उम्मीद ही बेमानी है। अब तो बस भगवान का ही सहारा है कि वो मप्र की जनता में जागृति पैदा करेे ताकि जनता सरकार को अपने प्रेशर में ले सके और सरकारी तंत्र थोड़ा तो ईमानदार हो जाए। 

या अल्लाह, कर मदद, हे राम, अब तो उतर आओ 

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