सिंधिया के लिए गौरवपूर्ण होगा इस जांबाज स्टूडेंट का सम्मान

Updesh Awasthee
भोपाल। सेलेब्रिटीज के हाथों पुरुस्कार प्राप्त करने से पुरुस्कार की वेल्यू बढ़ जाती है परंतु कुछ विनर्स ऐसे होते हैं जिन्हे सम्मानित करके व्हीआईपी भी गौरवान्वित महसूस करते हैं। ऐसा ही एक जांबाज स्टूडेंट है विदिशा का आयुष जैन, जो थैलीसीमिया जैसी खतरनाक बीमारी से पीड़ित है, फिर भी उसने बीई में गोल्डमेडल हासिल किया। अब उसे सम्मानित करने ज्योतिरादित्य सिंधिया आ रहे हैं। हम समझते हैं कि यह आशुष के लिए नहीं बल्कि सिंधिया के लिए गौरव का क्षण होगा कि वो जिंदगी के एक असली योद्धा से मिलने वाले हैं।

पढ़िए विदिशा के पत्रकार अजय जैन की यह रिपोर्ट:
जिंदगी में जिद और जुनून के आगे बड़ी से बड़ी बीमारी को भी हार मानना पड़ता है। जी हां, कुछ ऐसा ही शहर के युवा आयुष जैन ने कर दिखाया। जिसने थैलीसीमिया जैसी बीमारी को हराकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई में गोल्ड मेडल हासिल किया है। आयुष को 6 जून को पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया गोल्ड मेडल भेंट करेंगे।

एसएटीआई इंजीनियरिंग कालेज में इलेक्ट्रानिक्स एंड कंम्युनिकेशन ब्रांच में आयुष ने 8.9 सीजीपीए लाकर टापर की पोजीशन हासिल की है। आयुष की सफलता की कहानी इस बीमारी से जूझ रहे बच्चों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। वह बताता है कि बचपन में तीन माह की उम्र से ही उसे इस बीमारी ने घेर लिया था। जिसके चलते उसे हर 15 दिनों में रक्त चढ़वाना पड़ता है लेकिन उसने इस बीमारी को कभी खुद पर हावी नहीं होने दिया। उम्र बढ़ने के साथ ही वह इस बीमारी को चुनौती के रूप में लेता गया। उसने अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर लगा दिया।

इसमें उसके प्रेरणास्रोत पिता बसंत जैन और मां विभा जैन बनी। उन्होंने उसे हर कदम पर एक सामान्य छात्र के रूप में ही सलाह दी। यही वजह रही कि हर कक्षा में वह अव्वल आता रहा। आयुष के मुताबिक विदिशा शहर में ही थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों की संख्या एक दर्जन से अधिक है। उनमें उसकी उम्र सबसे अधिक है। वह अपनी सफलता से इन बच्चों को बताना चाहता है कि बीमारी से लड़कर भी लक्ष्य को पाया जा सकता है। इस सफलता के लिए आयुष ने अपने दर्द और तकलीफों को दरकिनार किया।

वह बताता है कि परीक्षा के दौरान तनाव बढ़ने पर शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा घट जाती थी। इसके कारण उसे 15 दिन की बजाए सात दिनों के भीतर ही रक्त चढ़ाना पड़ता था लेकिन उसने कभी इन तकलीफों के बावजूद कालेज मिस नहीं किया। आयुष के अनुसार बीई में उसे यह रैंक हासिल होने की पहले से ही उम्मीद थी। इसके लिए उसने नियमित पढ़ाई को ही अपना माध्यम बनाया था। वह अपनी सफलता का पूरा श्रेय सेंट्रल बैंक में कार्यरत अपने पिता बसंत जैन को देता है।

आयुष के मुताबिक यदि पिता हर कदम पर उसका हौसला अफजाई नहीं करते तो शायद वह भी अन्य बच्चों की तरह बीच में ही पढ़ाई छोड़ देता। आयुष का टीसीएस में सिलेक्शन हो चुका हैं। उसका लक्ष्य सरकारी संस्थान में नौकरी करने का है। इसी के लिए वह तैयारी में लगा हुआ है।

  • पत्रकार श्री अजय जैन, नईदुनिया के लिए काम करते हैं।



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