भोपाल। देश के प्रख्यात पत्रकारिता विश्वविद्यालय माखनलाल यूनिवर्सिटी में कुलपति बी.के.कुठियाला के खिलाफ अभियान फिर शुरू हो गया है। फेसबुक पर शुरू हुए इस अभियान को #लड़ाईजारीहै के साथ चलाया जा रहा है। आप कह सकते हैं कि चिंगारी भड़क रही है, जल्द ही सड़कों पर आग दिखाई दे सकती है।
Prashant Mishra ने की शुरूआत
मध्य प्रदेश के लिए शान की तरह था माखनलाल पत्रकारिता वि.वि. पत्रकारिता जगत और समाज को इसने बेहतरीन पत्रकार और प्रतिभायें दी. पिछले पांच सालों में इसके कुलपति बी.के.कुठियाला ने इस वि.वि. को बर्बाद करने में कोई कसर नही छोड़ी।
शैक्षणीक स्तर रसातल में चला गया. अयोग्य लोगों की, सिफारिश के दम पर नियुक्तियां हुई .मामले कोर्ट में चल रहे. कैम्पस प्लेसमेंट जीरो. अब पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष पुष्पेन्द्र पाल सिंह को हटा कर कुलपति कुठियाला ने वि.वि. की ताबूत में आखिरी कील भी ठोक दी।
इसके बाद शुरू हुआ सिलसिला, पढ़िए क्या क्या छप रहा है
Manish Chandra Mishra: शायद मैं भी संघी होता...
पिछले तीन साल में मैंने राष्ट्रवादी टाइप लोगों को भी संघ से कटते देखा है। वह पहले शाखाओं में भी जाते थे, लेकिन अचानक उनका मोह भंग होता गया। ऐसा कुठियाला की वजह से हुआ है। संघ की जड़ें मजबूत करने का ठेका लेने वाला कुठियाला दरअसल इसकी जड़ें खोद रहा है। अवसरवादी लोगों की फौज तैयार कर यह इसने इस पत्रकारिता के साथ संघ नामकी संस्था का खूब नुकसान किया है। मप्र सरकार व्यापमं घोटाले से पहले ही बदनाम है। कुठियाला घोटाले से इनकी और छीछी होने वाली है। अगर कुठियाला जैसे लोगों का नाम संघ से जुड़ा न होता तो शायद कोई भी संघी होने में शर्म महसूस नहीं करता। मैं भी नहीं।
मध्य प्रदेश के लिए शान की तरह था माखनलाल पत्रकारिता वि.वि. . पत्रकारिता जगत और समाज को इसने बेहतरीन पत्रकार और प्रतिभायें दी. पिछले पांच सालों में इसके कुलपति बी.के.कुठियाला ने इस वि.वि. को बर्बाद करने में कोई कसर नही छोड़ी.
शैक्षणिक स्तर रसातल में चला गया. अयोग्य लोगों की, सिफारिश के दम पर नियुक्तियां हुई .मामले कोर्ट में चल रहे. कैम्पस प्लेसमेंट जीरो. अब पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष पुष्पेन्द्र पाल सिंह को हटा कर कुलपति कुठियाला ने वि.वि. की ताबूत में आखिरी कील भी ठोक दी.
भीमशंकर साहू
संघ के संस्कारों को धूमिल करता कुठियाला...
Manish Chandra Mishra
इस साल फिर माखनलाल से बेरोजगारों की फौज निकलेगी। पांच सालों में कुठियाला ने यूनिवर्सिटी को कैंसर की तरह बर्बाद कर दिया है। अगर अभी इसका विरोध नहीं हुआ तो माखनलाल से निकले सीनियर्स की बनाई इज्जत मिट्टी में मिल जाएगी। इस संस्थान से पढ़कर निकले अच्छे लोग भी बेइज्जत होंगे। कुठियाला हटाओ पत्रकारिता बचाओ।

