भोपाल। सरकारी नौकरी के लालच में तत्कालीन वित्तमंत्री राघवजी की इच्छापूर्ति के लिए खुद को उपलब्ध कराने वाला कुकर्म कांड का पीड़ित अब 50 लाख में बिकने को तैयार है। वो आरोपी पूर्वमंत्री को ब्लेकमेल कर रहा है और जब राघवजी ने पैसे देने से इंकार कर दिया तो मीडिया में फिर से मामला उछाल दिया गया।
कुकर्म के आरोपी एवं मप्र के पूर्ववित्त मंत्री राघवजी के समर्थन में सामने आए गोपाल सिंह ने यह आरोप मामले के पीड़ित राजकुमार दांगी पर लगाए हैं। जबकि राजकुमार का कहना है कि वित्तमंत्री की ओर से उन्हें 50 लाख का आफर किया गया था, नहीं माना तो नौकरी से निकलवा दिया।
पीड़ित राजकुमार दांगी का आरोप है कि राघवजी के लोग उसे जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। उसे लगातार धमकी भरे फोन आ रहे हैं। धमकी देने वालों के नाम पूछने पर दांगी का कहना है कि वह उन सब लोगों काे जानता है लेकिन जान का खतरा होने के कारण उनका नाम नहीं बताना चाहता।
इसके विरुद्ध विश्व हिन्दू परिषद के गुलाबगंज तहसील अध्यक्ष गोपाल सिंह दांगी कहते हैं कि समझौते की पेशकश राघवजी की ओर से नहीं बल्कि दांगी की ओर से हुई थी। दांगी की ओर से 50 लाख रुपए मांगे गए थे। राघवजी के इंकार से बात नहीं बनी। राजकुमार दांगी का आरोप है कि वह एमपी नगर की एक होटल में अकाउंट सेक्शन में नौकरी करता था लेकिन राघवजी के कहने पर होटल प्रबंधन ने उसे नौकरी से निकाल दिया।
आरोपी राघवजी का कहना है कि मैंने उससे कभी संपर्क की कोशिश नहीं की। उसके लोग जरूर आते रहते हैं। ब्लैकमेल करते हैं। कहते हैं, पैसे दे दो तो समझौता हो जाएगा। रही बात नौकरी से निकलवाने की तो वो जिस भी होटल में रहा हो, वहां न तो मैं कभी गया, न ही वहां मेरा कोई संपर्क है। मैं उसे क्यों नौकरी से निकलवाऊंगा? मुझे लगता है कि उसकी बात को मीडिया में जगह मिलने से मेरे खिलाफ साजिश करने वाले सफल हो रहे हैं। अभी तो केस कोर्ट में चल रहा है, मीडिया को उसकी बात को इतनी तरजीह नहीं देना चाहिए। राघवजी, पूर्व वित्त मंत्री

