मप्र में बिना शौचालय शुरू हुए 35 हजार स्कूल

Updesh Awasthee
भोपाल। सुप्रीम कोर्ट और केन्द्र के आदेश के बावजूद मप्र के 35 हजार स्कूलों में शौचालयों का निर्माण नहीं हो पाया। पुअर मॉनीटरिंग एवं फंड की समस्या के चलते निर्माण कार्य अटके हुए हैं, एवं कई स्कूलों में शुरू ही नहीं हुए।

प्रदेश में 30 जून तक हर स्कूल में टॉयलेट बनकर तैयार हो जाना चाहिए था। लेकिन अभी तक प्रदेश के 35 हजार सरकारी स्कूलों में टॉयलेट नहीं बना है। स्कूलों में बिना टॉयलेट बने ही 16 जून से कक्षाएं चल रही है। हालाकिं जिला कलेक्टरों का कहना है कि तय तिथि तक ये निर्माण कार्य पूरा हो जायेगा। स्कूलों की हालत टॉयलेट से हीं नहीं बल्कि क्लास रूमों के कारण भी खराब है।

प्रदेश के 18 हजार स्कूलों में क्लास रूम की कमी है। जबकि बरसात का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में न नया निर्माण कार्य हो सकता है और न ही बच्चें खुलें में बैठकर पढ़ सकते है। आलम ये है कि बरसात के तीन महीनों में बच्चें की स्कूल की संख्या इन स्कूलों में आधी हो जाती है। टीचर्स भी कई बार तेज बारिश के चलते स्कूल नहीं पहुंच पाते है।

नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) प्रदेश में 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ है। यह कानून बच्चों को शिक्षा का बुनियादी हक देने के अलावा स्कूलों में सुविधाओं को भी नियंत्रित करता है। इसलिए सरकार ने शैक्षणिक सत्र अप्रैल 2010 के बाद नए स्कूलों को मापदंड पूरे करने की शर्त पर मान्यता दी। वहीं पुराने स्कूलों को मापदंड पूरे करने के लिए तीन साल का समय दिया था, जो दो बार बढ़ चुका है। पांच साल की अवधि के बाद भी सरकारी स्कूलों में आरटीई के मापदंड पूरे नहीं हो पाए है।

खास बात यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सभी स्कूलों में शौचालय बनाने के निर्देश के बाद मप्र में काम अधूरा है। प्रदेश के 72000 स्कूलों बाउंड्रीवाल, 51000 स्कूलों में खेल मैदान,43000 स्कूलों में रैंप  नहीं, 23000 स्कूलों में लायब्रेरी नहीं ,11000 स्कूलों में गर्ल्स टॉयलेट नहीं,11500 स्कूलों में बॉयज टॉयलेट नहीं,13350 स्कूलों में टायलेट नहीं और 5500 स्कूलों में पानी नहीं ऐसे में कैसे स्कूल चलें हम अभियान प्रदेश में सही अ​र्थों में सकार होगा।

  • यह हैं आरटीई के नियम
  • बालक-बालिका के लिए अलग-अलग शौचालय।
  • स्कूलों में स्वच्छ पेयजल।
  • किचन शेड, खेल मैदान, बाउंड्रीवाल, लाइब्रेरी, पठन पाठन सामग्री, उपकरण।
  • प्रायमरी में 30 छात्रों पर एक शिक्षक।
  • 150 से ज्यादा छात्र होने पर प्रधानाध्यापक।
  • मिडिल में 35 छात्रों पर एक शिक्षक की व्यवस्था।
  • सभी मौसम के लिए उपयुक्त भवन।
  • बाधामुक्त शिक्षा व्यवस्था।
  • प्रत्येक क्लास के लिए कक्ष, आॅफिस सह स्टोर सह प्रधानाध्यापक कक्ष हों।
  • प्रायमरी स्कूल में साल में दो सौ और मिडिल में 220 दिन पढ़ाई होनी चाहिए।
  • शिक्षकों की योग्यता डीएड और बीएड होनी चाहिए।


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