गाडरवारा। जिलेभर के शिक्षकों को 30 अप्रैल तक शाला की पुताई करने का फरमान जारी किया गया है। अगर किसी स्कूल की पुताई नहीं कराई तो उसकी नौकरी भी जा सकती है। यह आदेश कार्यालय जिला शिक्षा केन्द्र से कलेक्टर व डीईओ का हवाला देते हुए जिला पंचायत सीईओ के हस्ताक्षर के साथ जारी किया गया है।
जिले की समस्त शासकीय शालाओं के प्रधानपाठकों व बीआरसी को यह फरमान जारी किया गया है जिससे सभी स्कूलों के शिक्षक परेशान हो रहे हैं। हालांकि शालाएं पुताई के लिए कोई फंड नहीं होने का हवाला दे रही हैं।
पुताई के साथ मरम्मत भी कराएं
जारी आदेश में स्वच्छ भारत स्वच्छ विद्यालय अभियान विषयांतर्गत शाला भवनों की पुताई व मरम्मत की जानी है। पत्र में उल्लेख किया है कि अपर मुख्य सचिव मप्र शासन की भोपाल में आयोजित बैठक में दिए गए निर्देश का परिपालन करना है।
इमल्सन पेंट से करनी है पुताई
आदेश में लिखा है 13 अप्रैल को हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया है कि 30 अप्रैल तक समस्त जिले की प्राथमिक, माध्यमिक स्कूल भवनों की पुताई व मरम्मत किया जाना है। आदेश में स्कूल भवन की बाहरी व भीतरी दीवारों को नियमानुसार इमलसन पेंट से पुताई कराने के निर्देश दिए हैं। आदेश में चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित तिथि तक शाला भवनों की पुताई व मरम्मत नहीं की गई तो संबंधित के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
BRS डाल रहे दबाव
आदेश को पाकर समस्त शाला के प्रधान पाठक परेशान हो उठे हैं। आखिर स्कूल बंद होने के समय स्कूल भवनों की पुताई कराना कहां तक सही है। आदेश को लेकर स्कूलों के शिक्षकों में हडकम्प की स्थिति मची हुई है। वहीं शिक्षकों को कार्य करने के लिए बीआरसी दबाव बना रहे हैं। बिडम्बना यह भी है कि शाला विकास समिति के फंड में रुपए भी नहीं हैं और न ही शासन द्वारा पुताई व मरम्मत के लिए कोई फंड मुहैया कराया जाता है। शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान में वे परीक्षा परिणाम तैयार करने में व्यस्त हैं। 30 अप्रैल तक परीक्षा परिणाम घोषित करना है। ऐसे में स्कूलों में कैसे पुताई संभव हो सकेगी।
CEO ने हस्ताक्षरित टीप भी लिखी
स्कूलों की सफाई व पुताई के लिए सीईओ का रवैया सख्त नजर आ रहा है। सीईओ ने पत्र में हस्ताक्षरित टीप भी लिखी है कि बीआरसी, प्रधानपाठक ने यदि पुताई नहीं कराई तो सेवा से पृथक करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पुताई के लिए फंड की भी समस्या
शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो प्रत्येक स्कूल को सालभर में भवन मरम्मत हेतु तीन कक्ष के लिए पांच हजार रु. व तीन से अधिक कक्षों के लिए 10 हजार रु. की राशि राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल द्वारा जारी की जाती है। वर्तमान शिक्षा सत्र की शुरुआत में प्रवेशोत्सव के समय इस राशि से पुताई का कार्य शाला प्रबंधन समितियों द्वारा किया गया था। पंचायत चुनाव के समय भी मतदान केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं व मरम्मत करने में बची-खुची राशि खर्च कर ली गई थी। वर्तमान में स्कूलों के पास कोई भी फंड न होने से पुताई का कार्य असंभव लग रहा है। शिक्षकों का कहना है कि शासन फंड उपलब्ध कराए तो वे पुताई कार्य कर सकते हैं।
कर लिया डिसाइड
इस बार मैंने डिसाइड कर लिया है कि यदि किसी स्कूल की पुताई नहीं हुई तो नौकरी से निकालने की कार्रवाई करूंगा। एक दिन में सारे स्कूल की पुताई हो जाती है। यदि किसी स्कूल के पास फंड नहीं है तो बीआरसी से सम्पर्क करें। फंड मुहैया कराया जाएगा।
कौशलेन्द्र विक्रम सिंह,
जिला पंचायत सीईओ
फंड ही नहीं
वर्तमान में शिक्षक परीक्षा परिणाम बनाने में व्यस्त हैं। ऊपर से उन्हें यह आदेश जारी करना शिक्षकों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। वैसे भी शालाओं में फंड भी नहीं है।
नागेन्द्र त्रिपाठी, प्रदेश प्रवक्ता राज्य अध्यापक संघ

