भोपाल। व्यापमं घोटाले में अपने बेटे शैलेष यादव का नाम आने के बाद राज्यपाल रामनरेश यादव ने पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि मुझे राष्ट्रपति ने यह पद (राज्यपाल) सौंपा है। किसी के दबाव में इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि जिस तरह से व्यापमं मामले में मेरे बेटे का नाम उछाला जा रहा है, वह तुच्छ राजनीति है। मुझे बदनाम करने की साजिश की जा रही है।
यादव ने दावा किया है कि 50 साल के राजनीतिक जीवन में वे मुख्यमंत्री सहित कई बड़े पदों पर रहे, लेकिन उनके पास खुद का मकान तक नहीं है। चाहे किसी भी एजेंसी से जांच करा लो। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि राज्यपाल का पद संवैधानिक है। इस पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने की सिफारिश करने से पहले किसी भी एजेंसी को राष्ट्रपति की अनुमति लेना आवश्यक है। उन्होंने कहा- मुझे पूरा विश्वास है कि मैं और मेरा परिवार इस (व्यापमं घोटाला) अग्नि परीक्षा में निष्कलंक साबित होंगे। मैंने राज्यपाल के पद पर रहते हुए जो निर्णय लिए हैं, उन्हें मप्र के लोग मेरे जाने के बाद भी याद रखेंगे।
बीमार था, फिर भी आया विधानसभा
राज्यपाल ने कहा- आज मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं है। चलने में तकलीफ हो रही है, लेकिन मैं घुटनों में पट्टी बांधकर विधानसभा गया। यदि ऐसा नहीं करता तो लोग इसका गलत अर्थ लगाते।
मीडिया से नहीं मिले राज्यपाल
व्यापमं मामले में अपना पक्ष रखने के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया के कुछ चुनिंदा मित्र पत्रकारों को ही आमंत्रित किया था परंतु राज्यपाल महोदय ने इस संदर्भ में मीडिया से कोई बातचीत नहीं की। दैनिक भास्कर ने दावा किया है कि उनकी इस संदर्भ में चर्चा हुई है और राज्यपाल महोदय की ओर से यह बयान दैनिक भास्कर ने प्रकाशित यिका।

