रिटायमेंट के बाद भी करते रहे नौकरी, मिलती रही तनख्वाह

Updesh Awasthee
इंदौर। पत्नी प्राचार्य, पति लेखापाल। दंपति ने साठ साल की उम्र तक नौकरी की। पति एक साल पहले रिटायर हो गए और पत्नी चार महीने पहले। इसके बाद भी दोनों काम पर जाते रहे और सरकार तनख्वाह देती रही। उनके सेवानिवृत्त होने की खबर न विभाग को है और न ही अनुदान प्राप्त संस्था को। जांच हुई तो पोल खुली। अब विभाग ने तनख्वाह के रूप में दिए गए तीन लाख रुपए की रिकवरी का नोटिस थमाया है। मूक-बधिर दंपति खुद को रिटायर मानने को तैयार नहीं, रुपए भी नहीं लौटाना चाहते।

इस अजीबोगरीब मामले का खुलासा तब हुआ जब सरकार ने सामाजिक न्याय विभाग से संबद्ध शैक्षणिक संस्थाओं के शिक्षकों का नया वेतनमान लागू करवाने के लिए रिकॉर्ड मंगवाया। एसडीएम डीके नागेंद्र की जांच में पता चला कि स्कीम नंबर-71 स्थित मूक-बधिर संस्था के प्राचार्य डॉ.उषा पंजाबी और उनके पति लेखापाल राजकुमार पंजाबी की उम्र 60 साल पार हो चुकी है। नियमानुसार उन्हें रिटायर होना था। प्राचार्य को 4 महीने और लेखापाल को 1 साल ज्यादा हो गया है, फिर भी वे पद पर बने हुए हैं। प्रशासन ने इसे संस्था का दोष मानते हुए तनख्वाह की रिकवरी का लेटर जारी कर दिया, जबकि दंपति का कहना है कि सरकार ने 62 साल रिटायरमेंट की उम्र तय की है। विभाग ने गलत तरीके से नोटिस दिया है।

9 NGO जांच के घेरे में
मूक-बधिर संस्था के अलावा नवलखा स्थित महात्मा गांधी संस्था में भी एक शिक्षक की गलत नियुक्ति का मामला सामने आया। दोनों एनजीओ में पोल उजागर होने के बाद विभाग जिले के सभी 9 एनजीओ स्कूल भी जांच के घेरे में आ गए हैं। इनमें पदस्थ शिक्षकों की पात्रता की जांच होगी। नियुक्ति गलत पाई जाने पर इन संस्थाओं पर कार्रवाई के साथ शिक्षकों से भी रिकवरी हो सकती है।

आर्थिक अपराध करने पर नोटिस
मूक-बधिर संस्था की प्राचार्य-लेखापाल को गलत जानकारी देने के मामले में नोटिस जारी किया है। नियमविरुद्ध पद का उपयोग कर आर्थिक अपराध किया जा रहा है। रिकॉर्ड मंगवाने पर यह बात उजागर हुई। पहले विभाग द्वारा उनकी रिटायरमेंट उम्र 62 वर्ष मान्य कर ली गई, जबकि शिक्षक-कर्मचारी की रिटायरमेंट उम्र 60 वर्ष है। नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो दोनों से रिकवरी की जाएगी।
अनुपमा निनामा
संयुक्त संचालक, सामाजिक न्याय विभाग, इंदौर

जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी
संस्था में गड़बड़ी उजागर हुई है। रिटायरमेंट के बाद पैसा लेना अपराध है। विभाग का भी दोष है कि बिना देखे वेतन जारी कर रहे थे। रिकवरी हो सकती है। हमने जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी है।
डीके नागेंद्र
एसडीएम व प्रभारी, जांच समिति

  • इन संस्थाओं की भी होगी जांच

  1. मप्र दृष्टिहीन कल्याण संघ
  2. हेलन केलर एकेडमी
  3. विकलांग कल्याण संघ
  4. महेश दृष्टिहीन कल्याण संघ
  5. रोटरी पॉल हेरिस स्कूल
  6. गूंगे बहरों का स्कूल एमओजी लाइन


गलत नोटिस दिया, लड़ाई लड़ेंगे
अशासकीय अनुदान प्राप्त संस्थाओं में रिटायरमेंट की उम्र 62 साल है। हमारे पास 1990 का विभाग का पत्र है, इसके बाद कोई पत्र नहीं मिला है। गलत तरीके से नोटिस दिया गया है। रिकवरी का सवाल ही नहीं उठता। विभाग अपनी गलती हमारे ऊपर मढ़ रहा है। शासन को भी हमने पत्र लिख दिया है। हम शासन स्तर तक लड़ाई लड़ेंगे।
डॉ. उषा पंजाबी
(जैसा उन्होंने बेटी मोनिका पंजाबी के माध्यम से बताया)

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