इसलिए नहीं हुए लक्ष्मीकांत गिरफ्तार

shailendra gupta
उपदेश अवस्थी/भोपाल। व्यापमं घोटाले में एसटीएफ ने शुरूआत में राकेट बम की तरह काम किया। जिसका नाम सुनाई दिया उसी के आंगन में जा गिरा। एक के बाद एक दमादम गिरफ्तारियों का सिलसिला चला लेकिन लक्ष्मीकांत शर्मा का नाम आते ही सबकुछ जैसे थम सा गया।

इस मामले में जैसे ही पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा का नाम आया, पूरे के पूरे मामले ने ही यू टर्न ले लिया। नाम आते ही लक्ष्मीकांत शर्मा दिल्ली जा पहुंचे। उन्होंने भाजपा के तमाम बड़े नेताओं से संपर्क किया। इस बीच उनकी मुलाकात सीएम शिवराज सिंह चौहान से भी हुई। यह खुलासा भोपालसमाचार.कॉम ने ही किया था कि लक्ष्मीकांत शर्मा ने खुली चेतावनी दी है कि यदि उनकी गिरफ्तारी नहीं रुकी तो वो सबकी पोल खोल देंगे। उन्होंने गिरफ्तारी से पहले प्रेस कान्फरेंस की भी योजना बना ली थी।

भोपालसमाचार.कॉम के इस खुलासे के बाद मध्यप्रदेश भर के तमाम अखबारों ने इस खबर को प्रमुखता से उठाया और एक सप्ताह तक यह मामला गूंजता रहा। बाद में जैसा कि अनुमान लगाया गया था, वही हुआ। परफेक्ट सेटिंग हुई, लक्ष्मीकांत शर्मा अपने प्रिय संबंधी सुधीर शर्मा के साथ भोपाल आए और एसटीएफ आफिस पहुंचे। लम्बी बातचीत हुई। चायपानी भी हुआ और वापस चले गए।

कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। ना माननीय पूर्व मंत्री महोदय की और ना ही उनके सर्व सम्माननीय सगे संबंधी सुधीर शर्मा की। भोपालसमाचार.कॉम की खबर पुख्ता होने के बाद नई चर्चा यह सामने आई कि आखिर वो कौन से नाम थे जिन्होंने इस पूरे घोटाले का रुख ही मोड़ दिया। क्यों एसटीएफ के तीखे तेवर शांत हो गए। गिरफ्तारियों का सिलसिला बंद हो गया और सबकुछ लीपापोती जैसा दिखाई देने लगा।

मीडिया के प्रेशर में मंत्रीजी के ओएसडी शुक्ला जी की गिरफ्तारी करवानी पड़ी। गुस्साए शुक्लाजी ने पूछताछ में एसटीएफ के सामने सबकुछ उगल डाला। उन्होंने जितने भी नाम लिए वो कुछ ऐसे नाम थे जिनकी गिरफ्तारी तो दूर की बात, जिक्र तक एसटीएफ नहीं कर पा रही है।

इधर नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे ने व्यापमं घोटाले का मोहन भागवत कनेक्शन उजागर कर दिया है। उनका कहना है कि यदि उनका दावा गलत निकला तो वो राजनीति से सन्यास ले लेंगे। अब सवाल यह उठता है कि इस मामले में सरकार क्या कदम उठाएगी। क्या एसटीएफ को फ्री हेंड दिया जा सकेगा।

क्या होगा क्या नहीं हो पाएगा, यह तो आने वाले दिनों में पता ही चल जाएगा परंतु आज की तारीख तक यह तो तय हो ही गया है कि वो क्या कारण था जिसके चलते पूर्व मंत्री महोदय की गिरफ्तारी नहीं की गई थी।

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