ज्योतिष कहती है 'आप' ज्यादा लम्बा नहीं चल पाएगी

shailendra gupta
भ्रष्टाचार के खिलाफ जनांदोलन से पैदा हुई आम आदमी पार्टी बहुत कम समय में ही आश्चर्यजनक सफलता तक पहुंच गई परंतु आदर्श राज्य की स्थापना की मांग को लेकर मैदान में आने वाली पार्टी बहुत जल्दी दूषित हो जाएगी और अच्छे लोग इसे अलविदा कर देंगे। यह हम नहीं ज्योतिषीय आंकलन कहता है।

इसमें कोई दोराय नहीं कि 'आप' के विचार और कार्यशैली ने भारत में राजनीति को हिलाकर रख दिया है। लोगों को इनसे बहुत आशा और अपेक्षा है. मुख्य विरोधी दल भारतीय जनता पार्टी प्रधान मंत्री की कुर्सी के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है. कांग्रेस अपनी नयी छवि बनाने में लगी हुई है. इसके इतर आम आदमी पार्टी अपना नेटवर्क तेजी से बढ़ाती जा रही है।

क्या हो रहा है और क्या होने की संभावना है। राजनैतिक पंडितों और आलोचकों का काम है। वो इसके भविष्य का अनुमान भी लगा रहे होंगे परंतु हम यहां आपको बताने जा रहे हैं कि ज्योतिष 'आप' के विषय में क्या कहती है।

अष्टम भाव आयुष्य का मुख्य भाव है. लग्न का उपनक्षत्र व्यक्ति के स्वस्थ्य की जानकारी देता है. स्थिर लग्न के लिए नवं भाव बाधक होता है और नवमेश बधाकधिपति. द्वितीय और सप्तम मारक स्थान होते हैं.

इस कुंडली में लग्न का उपनक्ष्त्र स्वामी सप्तम भाव में है और षष्ठेश चंद्रमा के नक्षत्र में है. चन्द्रमा बहुत अधिक पाप कर्तरी मैं है . यह ठीक नहीं है. गुरु और सूर्य मारकेश हैं और शुक्र बधाकेश. सूर्य और शुक्र लाभ में बैठे हैं और गुरु पंचम में है .सूर्य शुक्र के नक्षत्र में है और शुक्र सूर्य के नक्षत्र में. शनि और गुरु दोनों ही गुरु के नक्षत्र मैं हैं और बुध सूर्य के नक्षत्र में. राहू और शनि अष्टम भाव में है और शुक्र की राशी में हैं. अतः राहू भी बाधकेश का कार्य करेगा.

केतु की महादशा ३१-१२-२०१५ तक है उसके बाद शुक्र और फिर सूर्य की महादशा शुरू होगी. अतः इस दल को केतु के बाद बाधक और मारक ग्रहों की दशा मिलेगी. राहू अपने ही नक्षत्र में है और बुध के नक्षत्र में कोई गृह नहीं है. लग्न पर गुरु की दृष्टि तो है मगर गुरु वक्री है. शुक्र भी वक्री है. यह कुंडली अल्पायु से मध्यायु का संकेत देती है. कोई दल एक व्यक्ति नहीं होता जिसकी मृत्यु की तारिख देखी जा सके किन्तु हम यह अवश्य देख सकते हैं की किस समय से यह दल निष्क्रिय हो सकता है ...वही एक तरह से दल की मृत्यु होती है.

लग्न के उपनक्ष्त्र स्वामी का सप्तम भाव में होना और छठे भाव के स्वामी के नक्षत्र में होना संकट दर्शाता है और येही आगे चलकर इस दल के पतन का कारण बन सकता है.
केतु की महादशा में कोई बड़ी दिक्कत आने की सम्भावना नहीं है, मगर उसके बाद शुक्र की महाद्दशा आएगी जो की बधाकापति है और लाभ स्थान को दर्शाता है अन्य स्थानों के साथ. राहू का अंतर १-३-२०२६ में समाप्त होगा और उसका प्रत्यंतर १३-८-२०२३ तक रहेगा. २०२३ से २०२६ के बीच का समय हम कह सकते हैं की इस दल के पतन का समय होगा जिसमें की यह पूर्ण रूप से निष्क्रिय हो जाएगा.

इस वर्ष भारत में लोकसभा के चुनाव हैं और इस दल का अभी केतु की महादशा में शनि का अंतर चल रहा है जो ३-१-२०१५ तक रहेगा. शनि पंचम और अष्टम भाव को बहुत स्पष्ट रूप से दर्शाता है. अतः यह किसी भी हाल में इस दल को आशातीत सफलता नहीं लेने देगा बल्कि इसके ठीक उलटे यह दल बहुत बुरी तरह से हारेगा .शनि लग्नेश होने साथ द्वादश भाव का भी प्रदर्शक है अतः इसी दल के लोगों के कृत्यों द्वारा ही लोगों में इसके लिए उपेक्षा का जन्म होगा.

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