उपदेश अवस्थी/भोपाल। मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार के पास पर्याप्त संख्याबल है। कांग्रेस के पास विधायकों की संख्या वैसे ही बहुत कम है उस पर सक्रिय विधायकों की गिनती तो दो दर्जन भी पूरी नहीं होती बावजूद इसके सरकार एक बार फिर विधानसभा सत्र समय से पहले समाप्त करने जा रही है।
विधानसभा का यह सत्र 17 जनवरी तक प्रस्तावित है। ऎसे में विपक्ष कई मुद्दों पर चर्चा चाह रहा है। विपक्ष पीएमटी घोटाले से लेकर व्यापमं तक के मामलों को उठाना चाह रहा है लेकिन सरकार ने सत्र को खत्म करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने आज ही विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण और बजट पर चर्चा कराने की तैयारी की है।
दरअसल, प्रदेश सरकार कभी भी विधानसभा सत्र को पूरा चलाने को लेकर गंभीर रवैया नहीं दिखाती है। हमेशा सरकारी कामकाज निपटाकर सत्र को खत्म कर दिया जाता है। पिछले कई सालों से प्रदेश सरकार कोई भी सत्र पूरा नहीं चला रही है। बस सरकारी कामकाज होते ही हंगामा कराकर सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया जाता है।
सवाल यह उठता है कि आखिर वो क्या कारण है जो सरकार विधानसभा सत्र कभी पूरा होने नहीं देना चाहती। विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका तक नहीं देती। क्यों वो विपक्ष का सम्मान नहीं करती। क्या गड़बड़ियां हैं जिनके सदन में उठने से वो डरती है। यदि वो चाहते हैं कि व्यापमं घोटाले पर चर्चा हो तो क्या बुराई है कि चर्चा करा दी जाए। यदि वो जवाब चाहते हैं तो देना चाहिए।
एक वक्त हुआ करता था जब पंडित जवाहरलाल नेहरू ने विपक्ष के मजबूत करने के लिए चुनाव हार चुके अटल बिहारी वाजपेयी को एक सीट खाली करवाकर पुन: चुनाव करवाकर सदन में केवल इसलिए बुलवाया ताकि विपक्ष में कोई तो हो जो सरकार से सवाल कर सके और एक वक्त यह है जब मध्यप्रदेश के सबसे लाड़ले और लोकप्रिय मुख्यमंत्री विधानसभा सदन में हमेशा विपक्ष से मुंह छिपाते मिलते हैं, डरपोक दिखाई देते हैं।
विधानसभा का यह सत्र 17 जनवरी तक प्रस्तावित है। ऎसे में विपक्ष कई मुद्दों पर चर्चा चाह रहा है। विपक्ष पीएमटी घोटाले से लेकर व्यापमं तक के मामलों को उठाना चाह रहा है लेकिन सरकार ने सत्र को खत्म करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने आज ही विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण और बजट पर चर्चा कराने की तैयारी की है।
दरअसल, प्रदेश सरकार कभी भी विधानसभा सत्र को पूरा चलाने को लेकर गंभीर रवैया नहीं दिखाती है। हमेशा सरकारी कामकाज निपटाकर सत्र को खत्म कर दिया जाता है। पिछले कई सालों से प्रदेश सरकार कोई भी सत्र पूरा नहीं चला रही है। बस सरकारी कामकाज होते ही हंगामा कराकर सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया जाता है।
सवाल यह उठता है कि आखिर वो क्या कारण है जो सरकार विधानसभा सत्र कभी पूरा होने नहीं देना चाहती। विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका तक नहीं देती। क्यों वो विपक्ष का सम्मान नहीं करती। क्या गड़बड़ियां हैं जिनके सदन में उठने से वो डरती है। यदि वो चाहते हैं कि व्यापमं घोटाले पर चर्चा हो तो क्या बुराई है कि चर्चा करा दी जाए। यदि वो जवाब चाहते हैं तो देना चाहिए।
एक वक्त हुआ करता था जब पंडित जवाहरलाल नेहरू ने विपक्ष के मजबूत करने के लिए चुनाव हार चुके अटल बिहारी वाजपेयी को एक सीट खाली करवाकर पुन: चुनाव करवाकर सदन में केवल इसलिए बुलवाया ताकि विपक्ष में कोई तो हो जो सरकार से सवाल कर सके और एक वक्त यह है जब मध्यप्रदेश के सबसे लाड़ले और लोकप्रिय मुख्यमंत्री विधानसभा सदन में हमेशा विपक्ष से मुंह छिपाते मिलते हैं, डरपोक दिखाई देते हैं।
