भोपाल। भास्कर और पत्रिका के बीच सांप और नेवले की दुश्मनी है यह तो सभी जानते हैं। पत्रिका को मिटाने के लिए भास्कर और भास्कर को निपटाने के लिए पत्रिका मध्यप्रदेश में पिछले लम्बे समय से संघर्ष कर रहे हैं परंतु अब यह तकरार और तीखी हो जाएगी।
मामला यह है कि IRS 2013 के ताजा आंकड़ों में भास्कर एक पायदान नीचे सरक गया है। उसकी पाठक संख्या बढ़ोत्तरी के बजाए 12 प्रतिशत की तीखी गिरावट दर्ज की गई है जबकि पत्रिका की पाठक संख्या एक साल में दो गुना बढ़ गई है। पत्रिकारिता के पंडित कह सकते हैं कि यह तो होना ही था, भास्कर अपने चरम पर है, अब कोई गुंजाइश शेष रह ही नहीं गई है और पत्रिका लगातार आगे बढ़ रहा है। अब जब पत्रिका बढ़ेगी तो भास्कर ही कटेगा, क्योंकि मध्यप्रदेश में शेष कोई रह ही नहीं गया है जिसके पाठकों पर अतिक्रमण किया जा सके।
समीक्षाएं कुछ भी हों, पत्रिका के विद्वान अपनी वाहवाही में कुछ भी कहें और भास्कर से बुद्धिजीवी कोई भी तर्क जड़ें परंतु एक बात तय है कि 2014 में भास्कर और पत्रिका के बीच तीखी तकरार दिखाई देगी। अब तक यह तकरार केवल मार्केटिंग में दिखाई दे रही थी। पत्रिका का एक विज्ञापन कैंसिल कराने के लिए भास्करवाले क्लाइंट को 50 प्रतिशत तक डिस्काउंट दे दिया करते थे परंतु अब यह जंग कई और नए मोर्चों पर भी दिखाई देगी।
IRS 2013 के नए आंकड़ों के बाद मध्यप्रदेश में पत्रकारिता का एक नया अध्याय शुरू होगा। कोई नर्इ् बात नहीं कि अब यहां खबरें खोजी ना जाएं बल्कि गढ़ दी जाएं। शब्दों में बढ़े अर्थ हैं जो साल जाते जाते तक सबको समझ आ जाएंगे।
देखते हैं जब दो सांड लड़ेंगे तो मध्यप्रदेश की मीडिया 2014 में क्या करवट लेगी।
IRS 2013 के अनुसार भारत के टॉप 10 हिन्दी न्यूजपेपर्स
1- दैनिक जागरण 15,526,000 एआईआर
2- हिन्दुस्तान 14,245,000 एआईआर
3- भास्कर 12,855,000 एआईआर
4- राजस्थान पत्रिका 7,665,000 एआईआर
5- अमर उजाला 7,071,000 एआईआर
6- पत्रिका 4,628,000 एआईआर
7- हरिभूमि 2,757,000 एआईआर
8- प्रभात खबर 2,718,000 एआईआर
9- नवभारत टाइम्स 2,291,000 एआईआर
10- पंजाब केसरी 2,480,000 एआईआर