भोपाल। नेता प्रतिपक्ष श्री अजय सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री श्री सुंदरलाल पटवा द्वारा विधानसभा आहूत करने के संबंध में सरकार को राज्यपाल द्वारा लिखी चिट्ठी के मामले में राज्यपाल से मिलने और उन्हें पत्र लिखने, पत्रकार वार्ता करने और सरकार की तरफ से पक्ष रखने पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि क्या वे शिवराज सिंह चौहान की तरफ से वकालत करने राज्यपाल के पास गए थे।
नेता प्रतिपक्ष ने पटवाजी को याद दिलाया कि वे शायद भूल गए कि तत्कालीन कांग्रेस की सरकार में एनडीए ने जनसंघ के संस्थापक भाई महावीर को राज्यपाल बनाया था और उन्होंने भाजपा के दबाव में राजभवन को भाजपा का ऐनेक्सी बना दिया था। तब उन्हें राज्यपाल पद की गरिमा का ध्यान नहीं था। उन्होंने कहा कि पटवाजी भ्रष्टाचार पर चर्चा से भागे शिवराज सरकार का बचाव कर रहे है और संविधान, संसदीय परंपरा की रक्षा करने वाले राज्यपाल पर लांछन लगा रहे है।
पटवाजी होते कौन हैं दखल देने वाले
नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने कहा कि पटवाजी जैंसे नेता द्वारा अपनी गरिमा का ध्यान न रखते हुए स्वयं ही एक असंवैधानिक पहल करते हुए एक ऐसे मामले में हस्तक्षेप किया जा रहा है जहां उनकी कोई भूमिका हीं नहीं है। श्री सिंह ने कहा कि वे राज्यपाल जैंसे पद को लांछित कर रहे है और 11 जुलाई को विधानसभा में जिस तरह से भाजपा सरकार ने असंवैधानिक कृत्य किया उसका बचाव कर लोकतंत्र की दुहाई दे रहे है।
भाई महावीर भी तो लेते थे ज्ञापन
श्री सिंह ने कहा पटवाजी को याद दिलाया कि किस तरह भाजपा के ज्ञापन भाई महावीर लेते थे और वे पत्रकारों से चर्चा कर सरकार की आलोचना करते थे। उन पर तो राजभवन के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जो सिर्फ मुख्यमंत्री और राज्यपाल के बीच होते थे उन्हें लीक करने का भी आरोप था। श्री सिंह ने कहा कि दोहरी बातें करना दरअसल भाजपा के चरित्र में है इसमें पटवाजी का कोई दोष नहीं है।
क्या सीएम हाउस से लीक हुआ राज्यपाल का पत्र
नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने सवाल किया कि राज्यपाल श्री रामनरेश यादव ने लोकतंत्र की मर्यादा और गरिमा को ध्यान में रखकर जो पत्र मुख्यमंत्री को लिखा वह पटवाजी को मिला कहां से, क्योंकि वह पत्र उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखा जो सिर्फ राज्यपाल और मुख्यमंत्री के ही बीच था, लेकिन पटवाजी जिस तरह पत्र का जिक्र कर रहे हैं उससे लगता है कि वे प्रदेश में समानांतर सरकार के सत्ता प्रमुख है।
क्या शिवराज अपना पक्ष रखने में सक्षम नहीं है
उन्होंने कहा कि क्या उनका चेला शिवराज इतने अक्षम है कि वे इस मामले में अपना कोई पक्ष नहीं रख सकते। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पटवाजी विपक्ष के राज्यपाल से मिलने पर तो सवाल उठा रहे हैं लेकिन स्वयं एक ऐसी प्रक्रिया का हिस्सेदार बन रहे हैं जो पूरी तरह सरकार-राजभवन के बीच चल रही है।
मर्यादाओं की हत्या को विधानसभा के भीतर हुई थी
नेता प्रतिपक्ष श्री सिंह ने कहा कि आजादी के बाद यह पहला अविश्वास प्रस्ताव है जो विधि, नियमों प्रक्रिया के तहत सदन में आया लेकिन उस पर कोई चर्चा नहीं हुई। श्री सिंह ने कहा कि पटवाजी ने बगैर पूरी जानकारी के पूर्वागृह से ग्रसित होकर आरोप लगा दिया। श्री सिंह ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव का नियम है कि जब तक वह ध्वनिमत से पारित न हो उस पर मतदान न हो वह पूरा नहीं होता। श्री सिंह ने कहा कि पटवाजी जिस अवैधानिक प्रक्रिया का समर्थन कर रहे हैं और कामकाज पूरा होने की बात कर रहे है वह उनकी अधूरी जानकारी है। सदन 19 जुलाई तक का था। कई सदस्यों के प्रश्न, अशासकीय, शासकीय संकल्प पर चर्चा होना थी। यहीं नहीं 10 जुलाई को जिस तरह छः घंटे चर्चा वाले 12 विधेयक को 20 मिनिट में निपटा दिया गया। जिस तरह मुख्यमंत्री विधायकों को निर्देशित कर रहे थे कि अविश्वास प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं देना चाहिए इसे वे स्वस्थ्य संसदीय पंरपरा मान रहे है।
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे
एक ऐसी गलत असंसदीय और लोकतंत्र विरोधी कृत्य का पटवाजी समर्थन करते है और राज्यपाल को नसीहत देते है। उन्होंने कहा कि पटवाजी प्रतिपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव से उनके चेले की सरकार इस कदर घबरा गई थी कि उस पर चर्चा न कराने का उसने ऐसा प्रपंच रचा जिसने पूरे मध्यप्रदेश को और संसदीय लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया। पटवाजी ऐसे असंसदीय कृत्य का समर्थन करते है और राज्यपाल की आलोचना करते है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा का लोकतंत्र पर कोई विश्वास नहीं है। वह संसदीय प्रक्रियाओं और संविधान की रक्षा को गलत ठहरा रहे है। इससे भाजपा का फासिस्टवादी चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया है।