राकेश दुबे@प्रतिदिन। धन्य है, भारत की सरकार और उससे ज्यादा धन्य है भारत सरकार का योजना आयोग| एक झटके में देश कि दिशा और दशा बदल दी| जादू कर दिया, देश के सबसे बड़े जादूगर मोंटेक सिंह अहलुवालिया ने|
देश के बड़े जादूगर कबूतर और परिंदे गायब करते-करते मर गये , नेता नाम के जादूगर सीमेंट, तेल , शक्कर गायब करते थे अब कोयला करते हैं , कोई –कोई जीवित वस्तु जैसे नारी [जबलपुर की ताज़ा घटना] पर भी हाथ की सफाई दिखा देते है | पर मोंटेक सिंह दा जवाब नहीं , एक ही झटके में १७ करोड़ लोग गरीबी की रेखा से गायब कर दिए | पक्ष – प्रतिपक्ष के जादूगर कुछ कर नहीं सके, अब कुछ ताली बजा रहे हैं और कुछ गाल |
हकीकत यह है की योजना आयोग जिस अवधि में गरीबी की रेखा को उपर उठा रहा था , उसी दौर में महंगाई १० से ४० प्रतिशत तक बड़ी है | योजना आयोग फरमाता है की गाँव में २७.२० कमाने वाला गरीब नहीं हैं,और शहर में ३३.३० पैसे कमाने वाला गरीब नहीं है |अर्थ यह निकलता है की पांच व्यक्ति का ग्रामीण परिवार अगर प्रतिमाह ४०८० रूपये कमाता है तो वह गरीब नहीं है इसी तरह शहर में प्रतिमाह ५००० रूपये कमाने वाला परिवार गरीब नहीं है | जादूगर मोंटेक सिंह को आटे- दल का भाव मालूम नहीं है | इस राशि में प्याज़-रोटी तक नसीब नहीं है |
बड़ी अजीब जादूगरी है, योजना आयोग की | उसका मानना है कि देश में हर साल २ प्रतिशत गरीब कम हो रहे है, मालूम नहीं कौनसा गणित है | बड़े घपले और बड़े अमीर जरुर सुनाई आते है , गरीब तो दिखाई देते हैं | मनमोहन जी, मोंटेक के इंद्रजाल से निकलें , नहीं तो कहीं के नहीं रहेंगे |
- लेखक श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रख्यात स्तंभकार हैं।
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