राज्य शिक्षा सेवा: फिर मजाक.. फिर ठगी... फिर छलावा...

आज ‘राज्य शिक्षा सेवा’ के गठन का प्रकाशन राजपत्र में जारी कर दिया गया,फिर वही हुआ जो होना था अध्यापक के साथ अन्याय, अध्यापक विरोधी लोग जाते-जाते न जाने क्या-क्या करेंगे।

शिक्षा विभाग में वर्तमान में 90 प्रतिशत वरिष्ठ अध्यापक है और 10 प्रतिशत व्याख्यता है परन्तु हाईस्कूल प्राचार्य के 50 प्रतिशत पद व्याख्यता के लिये आरक्षित,इनके लिये न कोई परीक्षा,न कोई इंटरव्यू,आओ और पाओं,यानि जितने भी ऐसे व्याख्यता जिनको 5 साल का अनुभव है, सभी प्राचार्य।

और 90 प्रतिशत वरिष्ठ अध्यापक जो 17 साल से व्याख्यता पद के विरूद्ध कार्य कर रहे है उनके लिये पहले परीक्षा,परीक्षा के अवसर भी कम सिर्फ 25 फीसदी पद, और एक और अर्ताकिक बात 25फीसदी पद ए.ई.ओ. की पदोन्नति के लिये आरक्षित,जब अभी ए.ई.ओ. का पद सृजित हो रहा है तो कम से कम पांच साल तक इनका प्रमोशन होना नही है तो फिर इनके लिये पदों का वर्तमान में आरक्षण क्यों ...

आदिवासी अंचल अमरवाड़ा की वर्तमान सरचंना ऐसी है ...

व्याख्यता 2 (जिनको पांच वर्ष का अनुभव है ) ,वरिष्ठ अध्यापक 18 ,ए.ई.ओ. 0 हाईस्कूल प्राचार्य पदों के लिये आरक्षण की नई व्यवस्था राजपत्र के अनुसार

20 पद

10 पद व्याख्यता के लिये - 2 व्याख्यता के लिये 10 पद आरक्षित है, थैला भर नोट मिलने के कारण व्याख्यता महोदय कहते है कि यदि आस पास प्रमोशन होता है तो ठीक नही तो शहर में ही भले । 5 पद वरिष्ठ अध्यापक के लिये - 18 वरिष्ठ अध्यापकों के लिये 5 पद वो भी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वरिष्ठ अध्यापक कहते है खोई हुये प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिये सरकार जहां भेजगी,सहर्ष रवाना होंगे।
5 पद ए.ई.ओ के लिये - ये 5 पद फिलहाल 5 साल तक खाली रहेंगे ।

यानि निरीक्षण,अकादमिक मानिटरिंग की अवधारणा पर बनी आर.एस.एस के अधिकांश पद य तो खाली रहेगें या अनुभवहीन लोगों के द्वारा संचालित होगें। दरअसल सरकारी नुमान्दें भी यही चाहते है।
हमारी सुन कौन रहा है ।

एक और बात समझ से परे जो व्याख्यता या वरिष्ठ अध्यापक पदोन्नति से वंचित है उन्हे प्रथम व द्वितीय क्रमोन्नति 30 वर्ष बाद
व्याख्यता - 15600 -39100 + 5400 ग्रेड पे
वरिष्ठ अध्यापक - 6500 - 250 - 11500

जब मुख्यमंत्री महोदय द्वारा ‘‘समान कार्य -समान वेतन’’ की घोषणा हो गई है तो फिर वरिष्ठ अध्यापक व व्याख्यता के लिये अलग अलग वेतनमान क्यों या तो घोषणा गलत है या राजपत्र के प्रकाशन में घोषणा का ध्यान नही रखा गया है । या फिर अध्यापक विरोघी लोगों की मंशा ही यही है।

परीक्षा से हम नही डरते परन्तु शिक्षा विभाग में जब आज तक प्रमोशन के लिये परीक्षा नही हुई तो अब क्यों ?
हमारे बाद नियुक्त सन 1998 के व्या.शिक्षा के व्याख्यता पहले हाईस्कूल फिर हायर सेकण्डरी प्राचार्य बिना परीक्षा के बन गये । किर अब परीक्षा क्यो? व्याख्यता के लिये परीक्षा नही,वरिष्ठ अध्यापक के लिये परीक्षा...

एक ही बात के लिये दोहरे मापदंड से प्रतीत होता है कि प्रदेश में अध्यापक विरोघी लोग अध्यापक का हित नही चाहते है।

अनिल नेमा
आम अध्यापक

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