डीके सिंगौर। प्रदेश में राज्य शिक्षा सेवा संवर्ग के गठन प्रक्रिया में अध्यापक संवर्ग विशेषतः वरिष्ठ अध्यापकों की घोर उपेक्षा की गई है जिसका उल्लेख निम्नानुसार है-
1. वरिष्ठ अध्यापकों की पदोन्नति नियमों के न होने से अब तक वरिष्ठ अध्यापक पदोन्नति से वंचित रहे हैं उन्हैं अगले वरिष्ठ पद की क्रमोन्नति तक का लाभ नहीं दिया गया है राज्य शिक्षा सेवा संवर्ग में भी वरिष्ठ अध्यापकों की वरिष्ठता एवं उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। राज्य शिक्षा सेवा संवर्ग के गठन हो जाने से यह भी निश्चित हो गया है कि भविष्य में वरिष्ठता एवं उपयुक्तता के आधार पर वरिष्ठ अध्यापकों की कोई पदोन्नति नहीं की जावेगी। जबकि सभी वर्ग के कर्मचारियों की वरिष्ठता एवं उपयुक्तता के आधार पर पदोन्नति के प्रावधान हैं।
2. राज्य शिक्षा सेवा गठन की कण्डिका 4 की उपकण्डिका (4) (ब) व (स) के अनुसार हाईस्कूल प्राचार्य के 50 प्रतिशत पद व्याख्याता और 25 प्रतिशत पद ए.ई.ओ. की वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति से भरे जायेंगें जबकि मात्र 25 प्रतिशत पद वरिष्ठ अध्यापकों द्वारा वो भी परीक्षा के द्वारा भरे जायेगें तर्क एवं न्याय संगत नहीं है।
3. राज्य शिक्षा सेवा गठन की कण्डिका 5 की उपकण्डिका (4) के अनुसार अधीनस्थ शिक्षा सेवा (ए.ई.ओ.) के लिये भी वरिष्ठ अध्यापकों को वंचित रखा गया है। प्रधानाध्यापक, उच्च.श्रैणी शिक्षक व अध्यापक को परीक्षा के द्वारा ए.ई.ओ. का अवसर दिया जा रहा है जबकि उपरोक्त सभी के लिये अन्य पदों पर पदोन्नति के भी अवसर हैं।
4. राज्य शिक्षा सेवा गठन की कण्डिका 6 में शासन ने खुद यह माना है कि वरिष्ठ अध्यापकों को राज्य शिक्षा सेवा में कम पदों पर आने का अवसर प्राप्त होगा इसके लिये 30 वर्ष की सेवा अवधि के पश्चात विशेष प्रोत्साहन अन्तर्गत 6500-250-11500 वेतनमान का प्रावधान किया गया है। उल्लेखनीय है कि 30 वर्ष की सेवा अवधि लगभग रिटायरमेंट की अवधि होती है इस अवधि में यह विशेष प्रोत्साहन का क्या औचित्य है साथ ही 30 वर्ष की सेवा उपरांत 6500 वाले वेतनमान की क्या प्रासंगिकता रह जायेगी ।
5. हाईस्कूल प्राचार्य के लिये वरिष्ठ अध्यापकों की परीक्षा में सम्मिलित होने के लिये अनुभव न्यूनत्तम 5 वर्ष रखा गया है इससे अब तक पदोन्नति से वंचित रहे सीनियर वरिष्ठ अध्यापकों के पदोन्नति के अवसर कम हो रहे हैं।
6. राज्य शिक्षा सेवा संवर्ग में प्राथमिक शाला प्रधानाध्यापक एवं माध्यमिक शाला प्रधानाध्यापक के पद सम्मिलित नहीं किया गया है जिससे सहायक अध्यापक/सहायक शिक्षक राज्य शिक्षा सेवा संवर्ग में सीधे आने का अवसर नहीं मिल रहा हैं।
अतः राज्य अध्यापक संघ आपसे निम्न लिखित मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने की मांग करता है-
1. अन्य सभी कर्मचारियों की भांति वरिष्ठता एवं उपयुक्तता के आधार पर वरिष्ठ अध्यापकों को भी अनिवार्य रूप से पदोन्नति दी जावे।
2. हाईस्कूल प्राचार्य के लिये 25 प्रतिशत पद व्याख्याताओं की पदोन्नति से व 75 प्रतिशत पद व्याख्याता, वरिष्ठ अध्यापक, ए.ई.ओ की सीमित परीक्षा से लिये जायें जिसमें सभी को समान अवसर मिले।
3. वरिष्ठ अध्यापकों को भी ए.ई.ओ. (समान वेतन पर) बनने का अवसर दिया जावे।
4. पदोन्नति से वंचित सभी केडर के कर्मचारियों के लिये 8 वर्ष में प्रथम क्रमोन्नति 16 वर्ष में द्वितीय क्रमोन्नति व 20 वर्ष में विशेष प्रोत्साहन (अतिरिक्त वेतनमान) का लाभ दिया जावे।
5. हाईस्कूल प्राचार्य के लिये वरिष्ठ अध्यापक की न्यूनतम शैक्षणिक अनुभव 5 वर्ष के स्थान पर 12 वर्ष किया जावे।
6. राज्य शिक्षा सेवा संवर्ग में प्राथमिक शाला प्रधानाध्यापक एवं माध्यमिक शाला प्रधानाध्यापक के पद सम्मिलित किये जायें जिससे सहायक अध्यापक/सहायक शिक्षक को राज्य शिक्षा सेवा संवर्ग में सीधे आने का अवसर मिले।