मध्यप्रदेश के गांव भी बन गए टापू, तैरकर आते जाते हैं स्कूल और अस्पताल

सीहोर। एक तरफ तो स्कूल चलो और विकास कार्यों की बात कही जा रही है, दूसरी और पिछले कई दिनों से जारी बारिश का पानी ग्रामीणों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। खारपा और कराडिया के मध्य बहने वाली नदी पूरे उफान पर होने के कारण आस-पास के आधा दर्जन से अधिक ग्राम के लोगों को हर रोज नदी के बहाव के बीच संघर्ष करके निकलना पड़ता है।

ग्राम कराडिय़ा के दर्जनों छोटे-छोटे बच्चे अपनी जान हथेली पर लेकर पढ़ाई करने जाते है। ग्राम कराडिय़ा के ग्रामीण धर्मेन्द्र मेवाड़ा, गौरेलाल पटेल, पन्नालाल मेवाड़ा, केशर सिंह मेवाड़ा, हरि नारायण विश्वकर्मा, प्रेम सिंह मेवाड़ा, नारायण सिंह मेवाड़ा, देवचरण मेवाड़ा, लखन सिंह मेवाड़ा, राजाराम वर्मा, अध्यापक प्रमोद मेवाड़ा, ओम मेवाड़ा, हरि ओम मेवाड़ा, भगवत चौकीदार, राजेश, मुकेश और आशीष  आदि ने बताया हम लोग जिला प्रशासन को कई बार आवेदन दे चुके है। लेकिन हमारी समस्या का समाधान नही हो पा रहा है। हर बारिश के मौसम में यही स्थिति बनी रहती है। 

जिसके कारण ग्राम में कोई गंभीर रूप से बीमार हो जाए तो उसको बहते हुए पानी से निकालना पड़ता है। ग्रामीणों ने नदी पर तत्काल पुल बनाने जाने की मांग की है। ग्राम के धर्मेन्द्र मेवाड़ा ने कहा कि पुल का निर्माण नही किया तो हम सभी ग्रामीण उग्र आंदोलन करने को विवश हो जाऐंगे।
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