भोपाल समाचार, 14 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश पुलिस के क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम ने एक ऐसा क्राइम पकड़ा है जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। CCTNS की रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में एक थाना प्रभारी ऐसा है जिसने अपनी लेटेस्ट पोस्टिंग में 150 से ज्यादा फर्जी मामले दर्ज किए हैं। उसके गवाह भी फिक्स हैं। एक उसका ड्राइवर है और दूसरा खाना बनाने वाला। सिर्फ इतना ही नहीं थाने की सफाई कर्मी को भी गवाह के रूप में दर्ज किया गया है जबकि उसको पता ही नहीं है। यह मामला 12 जनवरी से मीडिया हेडलाइंस में है लेकिन जब मऊगंज पुलिस अधीक्षक द्वारा थाना प्रभारी को लाइन अटैच किया गया तब आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ गई।
मऊगंज फर्जी गवाह कांड - सब इंस्पेक्टर जगदीश सिंह ठाकुर लाइन अटैच
मध्य प्रदेश पुलिस के क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम ने इस मामले का खुलासा किया है। मनीष की रिपोर्ट में बताया गया है कि नवगठित मऊगंज जिले के इंद्रगढ़ी और नईगढ़ी पुलिस थानों में थाना प्रभारी रहे सब इंस्पेक्टर जगदीश सिंह ठाकुर को लाइन अटैच कर दिया गया है और उनके खिलाफ इंक्वारी शुरू हो गई है। मऊगंज एसपी दिलीप कुमार सोनी का कहना है कि इस मामले की जांच डीएसपी करेंगे और उन सभी फाइलों को दोबारा खोला जाएगा दिन में गवाहों को लेकर कोई गड़बड़ी हुई है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2022 से लेकर 2025 तक 500 से ज्यादा ऐसे मामले हैं जिसमें सब इंस्पेक्टर जगदीश ठाकुर का ड्राइवर अमित कुशवाहा या खाना बनाने वाला दिनेश कुशवाहा के जैसे फिक्स गवाह होते हैं। मीडिया ट्रायल के दौरान पाया गया कि कुछ गवाह तो ऐसे हैं जिन्हें याद ही नहीं है कि वह किस मामले में गवाह है। उनका कहना है कि वह तो कभी कोर्ट में गवाही देने गए भी नहीं। पुलिस ने अपनी डायरी में क्या लिख लिया है उनका क्या पता।
सब इंस्पेक्टर के साथ गवाहों का भी ट्रांसफर होता है
सीसीटीएनएस के मुताबिक, थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर के ड्राइवर अमित कुशवाहा, सब्जी विक्रेता व कुक दिनेश कुशवाहा 106 मामलों में संयुक्त रूप से गवाह और मुखबिर हैं। 18 में तो अमित अकेला गवाह है। मऊगंज के नईगढ़ी थाना में पदस्थ रहे सब इंस्पेक्टर जगदीश सिंह ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने गांजा, अवैध शराब और हथियार जैसे मामलों में भी करीबियों को ही गवाह बनाया। खास तौर पर अमित कुशवाहा। जहां-जहां जगदीश की पोस्टिंग रही, वहां-वहां अमित गवाह के रूप में दिखता है।
- 106 मामलों में दोनों संयुक्त गवाह। 2020 में अमित की उम्र 20 साल लिखी, जबकि 2025 में सिर्फ 21 साल। एक केस में खुद को फरियादी भी बताया।
- दिनेश ने कहा कि वे थाने में खाना बनाते हैं। ठाकुर के समय केवल एक मामले में गवाही दी थी, वह भी गांजे का था।
सफाई कर्मी को पता ही नहीं वह 14 मामलों में गवाह है
सफाई करने वाले रमाकांत यादव 14 मामलों में गवाह हैं। उनका कहना है कि उन्हें याद नहीं कि वे किन परिस्थितियों में गवाह बने। वे नईगढ़ी थाने में सफाई का काम करते हैं। कभी कोर्ट नहीं गए। राहुल विश्वकर्मा थाने की गाड़ी चलाते हैं। 18 मामलों में गवाह हैं। राहुल बोले- कभी गवाही देने नहीं गया। पुलिस गवाह के तौर पर नाम लिख देती थी।
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