अनूपपुर(राजेश शुक्ला)। जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव का समय करीब आ रहा है वैसे-वैसे प्रत्याशियों के मिजाज में भी परिवर्तन दिखाई पड़ रहा है, प्रत्याशियों ने जनता से नजदीकियां बढ़ाना प्रारंभ कर दिया है जो नेता कल तक जनता से मिलने से कतराते थे वे आज मतदाताओं को सम्मान दे रहे हैं और अपने मुंह से दादा भाईया, काका कहते हुये गले मिल रहे हैं।
मतदाताओं की आवभगत से वो इस बात का अंदाजा लगा लिया है कि गिरगिट रंग बदलने लगा तो समझों चुनाव करीब है। पुष्पराजगढ़ विधानसभा में इस बार विधानसभा चुनाव में त्रिकोणी मुकाबला होने की आसार दिखाई दे रहे हंै। टिकिट की दावेदारी के लिये नेता अपनी आकाओं की चरण वंदन में लग गये हैं। वहीं विपक्षी इस बार यह सीट भाजपा से छीनने के लिये अपनी एड़ीचोटी एक करने से नहीं चूकेंगे और अपने जिताऊ प्रत्याशी को ही मैदान में उतारकर भाजपा को हटाने की फिराक में हैं।
वहीं वर्तमान भाजपा विधायक सुदामा सिंह भी अपनी सीट को यथावत रखने के लिये पूरा जोर लगायेंगे ताकि पिछले दो पंचवर्षीय चुनावों में भाजपा ने कांग्रेस से यह सीट हथिया ली थी। वहीं इस बार गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी जो पिछले चुनावों से तीसरे नंबर पर रही है। वह भी पूरा दमखम लगाकर चुनाव मैदान में होगी। गोंगपा इसके लिये पिछले दो सालों से इस क्षेत्र में अपना जनाधार बढ़ाने के लिये कार्य कर रही है।
विधानसभा क्षेत्र पुष्पराजगढ़ की भौगोलिक स्थिति में जिसका क्षेत्रफल १७६४ वर्ग कि.मी.के क्षेत्र में विस्तारित है यहां २६७ आबादी ग्राम है, ६ वीरान २७३ ग्रामों में विभिन्न समुदाय के लोग निवासरत है। समूचे पुष्पराजगढ़ में ६० प्रतिशित आदिवासी, शेष ४० प्रतिशित अन्य वर्ग के लोग हैं। इस क्षेत्र में आदिवासियों की बाहुल्यता होने के कारण यह क्षेत्र आदिवासियों के लिये सुरक्षित माना जाता है। विधानसभा पुष्पराजगढ़ क्रं. ८७ में कुल मतदान केेंद्र २३२ है। जहां लगभग २० लाख से अधिक मतदाता २०१३ के विधानसभा चुनाव में अपने मतों का प्रयोग करेंगे।
कांग्रेस के प्रत्याशी
आगामी विधानसभा चुनाव में अपने-अपने दलों से टिकिट के दावेदारी करने में नेताओं ने होड लगा दी है। चुनाव लडऩे की चाह रखने वाले नेता आपने आकाओं के दरवाजे भोपाल से लेकर दिल्ली तक जा पहुंचे हैं। जहां सड़कों की खाक छान रहें है और अपने आकाओं के सामने अपने जीत का दावा भी कर रहे हैं कि अगर पार्टी हमें अपना प्रत्याशी बनाती है तो हम इस क्षेत्र से पार्टी को विजयी दिलाएंगे। कांगे्रस से कई दावेदार हैं जिसमें प्रमुख पुराने पराजित प्रत्याशी फुन्देलाल सिंह के अलावा पूर्व मंत्री स्व. दलवीर सिंह के भतीजे नर्मदा सिंह सहित कोदू सिंह, बिरझूदास सोनवानी, तोप सिंह सरपंच मङाौली, ललन सिंह शिक्षक एवं भूतपूर्व विधायक शिव प्रसाद सिंह तथा पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष अमरकंटक श्रीमती मीना पड़वार टिकट की दावेदारी प्रस्तुत कर रहे हैं। जिसमें सबसे प्रबल दावेदार फुन्देलाल मार्को और शिव प्रसाद सिंह हैं। अब यह फैसला कांग्रेस के मुखिया के ऊपर है कि वह किसे प्रत्याशी बनाती है। लगातार हारने वाले व्यक्ति को या पूर्व विधायक को उतारती है, वहीं एक नाम और है जिसपर कांग्रेस अपना पत्ता खोल सकती है। वो है सांसद राजेेश नंदिनी सिंह जिसे कांग्रेस विवाद की स्थिति होन पर अंतिम समय इन्हें प्रत्याशी घोषित कर सकती है जिससे पार्टी में कोई विरोध नहीं होगा और कांग्रेस के जीतने के आसार भी हो सकते है।
भाजपा में भी दावेदार
ऐसा नहीं है कि कांग्रेस में दावेदार बहुत है यही हाल भाजपा का है। जिसमें प्रमुख वर्तमान विधायक सुदामा सिंह के साथ फूलचन्द्र मरावी सचिव, धनसिंह मरावी, हीरा सिंह श्याम जिला पंचायत सदस्य, भूतपूर्व सांसद दलपत सिंह परस्ते, बाबू लाल मार्को एवं विधायक की धर्मपत्नी श्रीमती इन्द्राणी सिंह सिंग्राम टिकिट के दौड में हैं। विधायक को छोड़कर बाकी सभी अपने-अपने आकाओं के माध्यम से पार्टी की टिकट पाने की जुगत में लगे हैं। ये दावेदार मंत्री एवं पार्टी के पदाधिकारियों के दरवाजों में हाजिरी देने में जरा भी चूक नहीं करते। यहां तक की मंत्रियों को रिस्तेदार है कहने में भी चूकते। तीसरी बार भी सरकार बनाने के लिये पार्टी मैदान में उसे उतारेगी जो व्यक्ति इस क्षेत्र में जीतकर प्रदेश मेें सरकार बनाने में सहयोग कर सके। जिसमें प्रमुख दावेदारों में वर्तमान विधायक सुदामा सिंह एवं फूलचंद्र मराबी के अलावा दलपत सिंह परस्ते के बीच पार्टी टिकिट का मुकाबला हो सकता है। भाजपा इस बार पुष्पराजगढ़ से अपना प्रत्याशी बदलने के मूड में भी दिखाई दे रहा है।
गोड़वाना नहीं किसी से कम
कई वर्षो से इस क्षेत्र में कार्य कर रही गोंगपा लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है । कुछ एक क्षेत्रों में तो इसका अच्छा खासा प्रभाव देखने को मिला है। भाजपा एवं कांगे्रस के गढ़ में गोड़वाना गणतंत्र पार्टी सेंध लगाने में कामयाब हो जाती है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। गोंगपा के प्रत्याशी दो चुनावों में दूसरे व तीसरे नंबर पर पहुंचकर सबकों चौंका दिया था। और भाजपा और कांग्रेस की लड़ाई में इसका सीधा फायदा इसे मिले जिसमें पार्टी की ओर से प्रमुख दावेदार ललन सिंह परस्ते होंगे। जिन्होंन क्षेत्र में काफी कार्य किया है। जिससे जनता भूल नहीं सकती ।
बसपा भी भरेगी दम
इस क्षेत्र से बहुजन समाजवार्दी पाटी भी अपना प्रत्याशी खड़ा करेगी। बसपा ने जब फुंदेलाल सिंह को अपना प्रत्याशी बनाया था तो बसपा तीसरे नंबर पर थी, किंतु फुंदेलाल के कांग्रेस में शामिल होने के बाद पार्टी हासिये पर आ गई थी, किंतु पार्टी के लोगों ने इसे उठाते हुये अब इस मुकाम पर आ गई है कि वह चुनाव में अपना प्रत्याशी उतारकर अन्य दलों को परेशान कर सकती है। जिसमें अशोक बघेल जो इस समय जय माता दी का बीडा उठाये हुये है किन्तु रामकृपाल सचिव को जय शक्ति चेतना पार्टी की उम्मीदवारी घोषित हो जाने से पुन: वह बहुजन समाजवादी में लौटकर टिकिट की दावेदारी कर सकते है। विधानसाभा चुनाव में इनके अलावा समाजवादी पार्टी, जनतादल युनाईटेड, कम्युनिष्ट पार्टी भी अपना प्रत्याशी मैदान में उतारेगी किंतु इन पार्टी का कोई खास जनाधार नहीं है। जिससे इनके होने ना होने से कोई खास अंतर नहीं पड़ेगा। और ये लोग वर्र्तमान शासन प्रशासन से असंतुष्टों को अपने साथ लेकर प्रमुख दलों के प्रत्याशियों को घेर सकते हैं। टिकिट की दावेदारी करने वाले लोग जनता के कितने करीब हैं यह तो चुनाव के समय ज्ञात होगा।
पूर्वानुमान
एक सर्वे के अनुसार भाजपा अपने प्रत्याशी को अगर बदलती है तो पार्टी को इसका लाभ मिल सकता है, अन्यथा पार्टी को जीत के लिये भारी मसक्कत करनी पडेगी। सबसे ज्यादा खराब हालत निचले क्षेत्रो में है जिसमें पार्टी का जनाधार नहीं दिखते है। यहां कांग्रेस के लोग अधिक हैं इसके साथ ही क्षेत्र के लोग वर्तमान से नाराज हैं जिसका नुकसान पार्टी को हो सकता है। पार्टी के सर्वे के अनुसार यह बात सामने आई है। इस बार पार्टी एक नये चेहरे को सामने लाना चाहती है अब समय बतायेगा कि पार्टी किसे अपना प्रत्याशी बना कर दमदारी से मतदाताओं के सामने पेश करती है और मतदाता उसे अपनाते हैं या नहीं यह तो समय बतायेगा।