इन्दीवर कटारे/डिण्डौरी। जनपद मुख्यालय अमरपुर में शासकीय योजना के तहत मजदूरों को दिया जाने वाला लगभग 900 क्विंटल चावल गोदाम में रखे हुये सढ़ गया। पूर्व में संचालित स्वर्ण जयंती ग्रामीण रोजगार योजना के लिए वर्ष 2006 में चावल जनपद मुख्यालय में संग्रह कर रखा गया था।
स्वर्ण जयंती योजना और काम के बदले अनाज योजना के बंद हो जाने के बाद इन योजनाओं की राशि और खाद्यान्न राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में मर्ज कर दी गई। लगभग ७ वर्षों से एक ही स्थान पर रखा हुआ चावल पूरी तरह खराब हो चुका है जो खाने लायक नही है। संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के कारण ९०० क्विंटल चावल गरीब मजदूरों को नहीं मिल सका।
गठित हुआ था जांच दल रू- मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत अमरपुर के पी राजौरिया के अनुसार मजदूरों के लिए संग्रह कर रखा गया चावल पूरी तरह बर्बाद हो चुका तब कलेक्टर द्वारा वित्तीय कलेक्टर की अध्यक्षता में जांच दल का गठन किया गया। जांच दल ने जांच के बाद चावल की गोदाम को सील कर दिया था। गोदाम में रखे हुये चावल की जांच करने खाद्य एवं औषधि निरीक्षक तथा मध्यान्ह भोजन क्वालिटी इंस्पेक्टर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि १५ जुलाई २००९ को ग्राम पंचायत ङिालमिला को चावल प्रदान किये जाने तत्कालीन रोजगार गारंटी के लेखापाल द्वारा मोटर सायकल मैकेनिक को बुलाकर ताला तुड़वाया गया था। जिसके बाद अनाज पूरी तरह सढ़ा हुआ पाया गया और चूहों का मजमा लगा हुआ था। तब पंचायत को उक्त चावल नहीं दिया गया।
लाखों रूपये की हुई क्षति रू- ७ वर्षों के दौरान निर्माण कार्य करने वाले मजदूरों को चावल का वितरण नहीं किया गया और जब चावल पूरी तरह बर्बाद हो गया तथा खाने लायक नहीं रह गया तब उसे ग्राम पंचायत को देने के आदेश दिये गये। समय रहते यदि जिला प्रशासन द्वारा इस संबंध में उचित कार्यवाई की जाती तब लाखों रूपये की आर्थिक क्षति शासन को पहुंचने से बच जाती। वर्षों से गोदाम में रखे हुए चावल के खराब होने तथा सढ़ जाने की जवाबदारी अब तक किसी भी अधिकारी पर नहीं थोपी गई है और न ही इस विषय में कोई उचित और गंभीर कार्यवाई ही की गई है। जबकि जनपद क्षेत्र के मजदूर मजदूरी भुगतान के लिए जनपद पंचायत कार्यालय का घेराव और भूख हड़ताल तक कर चुके हैं।
जितना दर्शाया उतना है नहीं रू- जनपद पंचायत के स्टॉक रजिस्टर में 900 किंवटल चावल दर्शाया जा रहा है, जबकि सूत्र बताते हैं कि गोदाम के अंदर कुछ ही क्विंटल चावल पाया गया है शायद यही वजह है कि कोई भी अधिकारी जोखिम नहीं उठाना चाहता। २६ जुलाई २००९ तक गोदाम में लगभग 1400 क्विंटल चावल रखा था जो खाने योग्य था। बाद में यही चावल घटकर ९०० क्विंटल हो गया। अब यह घटा हुआ नष्ट हो चुका चावल चूहों के खाने योग्य भी नहीं बचा है। जिला प्रशासन द्वारा अब तक इस संबंध में कोई ठोस कार्यवाई नहीं की गई है और न ही किसी अधिकारी पर जवाबदारी थोपी गई है।